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Bihar: सीवान डाक विभाग में बड़ी लापरवाही उजागर, वर्षों से गैरहाजिर डाकपाल उठा रहा वेतन, जांच की मांग तेज
Fri, 04 Jul 2025 05:08 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Fri, 04 Jul 2025 05:08 PM IST
सार
सीवान जिले के प्रतापपुर डाकघर में तैनात डाकपाल राकेश कुमार यादव पर वर्षों से बिना हाजिरी के वेतन लेने का आरोप लगा है। आनंद नगर निवासी मनोज कुमार सिन्हा ने डाक निरीक्षक को आवेदन देकर इसकी जांच की मांग की है।
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डाक विभाग में बड़ी लापरवाही हुई उजागर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीवान डाक विभाग में लापरवाही और अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। आनंद नगर निवासी मनोज कुमार सिन्हा ने प्रतापपुर शाखा डाकघर में तैनात डाकपाल राकेश कुमार यादव के खिलाफ जांच की मांग करते हुए डाक निरीक्षक को लिखित आवेदन सौंपा है। मनोज सिन्हा के अनुसार, राकेश कुमार यादव पिछले कई वर्षों से कार्यालय से अनुपस्थित हैं, बावजूद इसके उन्हें डाक विभाग से नियमित वेतन दिया जा रहा है। आरोप है कि बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे दिल्ली की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, लेकिन प्रतापपुर शाखा डाकघर में उनकी नियुक्ति आज भी बरकरार है।
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शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि प्रतापपुर डाकघर से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेख, जैसे दैनिक लेखा आदि, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपडेट किए जा रहे हैं। इससे सरकारी दस्तावेजों की सत्यता और विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला डाक विभाग की आंतरिक निगरानी प्रणाली की कमजोरी को उजागर करता है। एक कर्मचारी की वर्षों तक अनुपस्थिति और फिर भी वेतन प्राप्त करना, न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि यह ईमानदार कर्मचारियों के साथ अन्याय भी है।
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जब इस संबंध में डाक निरीक्षक उमंग जैन से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि "जांच चल रही है"। उनका यह अस्पष्ट बयान विभागीय गंभीरता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। मनोज सिन्हा ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
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शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि प्रतापपुर डाकघर से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेख, जैसे दैनिक लेखा आदि, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपडेट किए जा रहे हैं। इससे सरकारी दस्तावेजों की सत्यता और विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला डाक विभाग की आंतरिक निगरानी प्रणाली की कमजोरी को उजागर करता है। एक कर्मचारी की वर्षों तक अनुपस्थिति और फिर भी वेतन प्राप्त करना, न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि यह ईमानदार कर्मचारियों के साथ अन्याय भी है।
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जब इस संबंध में डाक निरीक्षक उमंग जैन से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि "जांच चल रही है"। उनका यह अस्पष्ट बयान विभागीय गंभीरता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। मनोज सिन्हा ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।