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लालू प्रसाद जो आज कर सकते थे

Fri, 20 Nov 2015 06:06 PM IST
अखिलेश श्रीवास्तव/ अमर उजाला, दिल्ली
अखिलेश श्रीवास्तव/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 20 Nov 2015 06:06 PM IST
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Lalu unfulfilled that was expected from him

बिहार में संभावनाओं से परे जीत दर्ज करने वाले लालू प्रसाद यादव से आज जो उम्मीद की जा रही थी वो पूरी नहीं हुई।

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माना जा रहा था कि वो बेटों की तुलना में राजनीतिक तौर पर अपेक्षाकृत परिपक्व मीसा भारती को नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल कराएंगे। लेकिन उन्होंने उसी परिपाटी को आगे बढ़ाया जो हिंदुस्तान के पुत्रमोही नेता करते आए हैं।

अगर लालू ने पुत्रीमोह दिखाया होता तो उनका ये निर्णय ना केवल राजनीतिक चातुर्य साबित होता बल्कि एक बड़ी जीत के बाद बिहार में उनकी नई छवि बनाने में भी मददगार होता।
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दोनों बेटों के बजाय मीसा भारती को मंत्रिमंडल में शामिल करने से लोगों के बीच एक अलग राजनीतिक संदेश जाता। पहला यह कि वे पुत्रमोह की राजनीति के आरोपों से बच जाते, दूसरा यह कि इसे एक प्रगतिशील कदम के तौर पर देखा जाता। वैसे भी उनके दोनों बेटों का ये पहला ही राजनीतिक इम्तिहान था और पहली सफलता में उनको मंत्री पद पारितोषिक से नवाजना कुछ जल्दबाजी ही कहा जाएगा।
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बिहार की जनता ने लालू प्रसाद को जितनी सीटें दी हैं, उसके मुताबिक वो उनसे छोटे स्वार्थों से ऊपर उठकर एक बड़ी भूमिका की उम्मीद कर रहे हैं।

बिहार अब चारे की जुगाली, डमी मुख्यमंत्री की राजनीति से ऊपर उठकर नई इबारत लिखने की कोशिश में दिखता है।

हो सकता है लालू ने अपनी बेटी मीसा भारती के लिए कोई अलग भूमिका सोच रखी हो लेकिन फिलहाल उन्हें मंत्री ना बनाकर अपने दोनों बेटों को पद दिलवाने से यही संदेश गया कि सामाजिक भेदभाव दूर करने की बात करने वाला लालू भी अपनी राजनीतिक विरासत को बेटा-बेटी के आईने से देखता है।

बिहार में इस बार महिलाओं ने मतदान करने के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया। उन इलाकों में जहां पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने अधिक मतदान किया, वहां महागठबंधन खासकर जेडीयू को ज्यादा वोट मिले।


मतलब साफ है कि नीतीश सरकार के लिए महिलाओं का भी खूब समर्थन मिला है। ऐसे में अगर नीतीश भी मीसा के लिए लालू को मना पाते तो उनके मंत्रिमंडल में महिलाओं की उपस्थिति अपेक्षाकृत कहीं ज्यादा दमदार होती।

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