यूपीए के चेहरों को चुनाव प्रचार से रोक रहे नीतीश-लालू
बिहार में लगभग आधा चुनाव बीतने के बाद महागठबंधन का चुनाव प्रचार सिर्फ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दम पर आगे बढ़ रहा है।
महागठबंधन में 40 सीटों पर लड़ रही कांग्रेस और यूपीए के बड़े चेहरों को जदयू और राजद ने चुनाव प्रचार से लगभग दूर रखने की पूरी कोशिश की है। बिहार में कांग्रेस के उम्मीदवार भी नीतीश कुमार की छवि पर निर्भर होकर जीत की उम्मीद कर रहे हैं।
बिहार चुनाव में अभी तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और राजबब्बर के अलावा किसी बड़े नेता की मांग चुनाव प्रचार के लिए जदयू और राजद की ओर से नहीं की गई है।
यही नहीं, अपने उम्मीदवारों के लिए राहुल गांधी से चुनाव प्रचार करवाने को लेकर जदयू और राजद ने खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
'यूपीए के कार्यकाल को जनता अभी भूली नहीं'
जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को कहा कि कांग्रेस से महागठबंधन को प्रतीकात्मक रूप से बल तो मिला है। मगर जदयू की पूरी कोशिश रही है कि यूपीए शासनकाल की छाया को चुनाव को दूर रखा जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुरूआत में एक बार महागठबंधन की रैली में नीतीश कुमार और लालू यादव के साथ मंच साझा किया। उसके बाद ऐसा मौका नहीं आया। पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने कुछ जगह पर राजद और जदयू उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार किया है।
मगर राहुल और सोनिया के अलावा यूपीए में केंद्रीय मंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार से दूर रखने की कोशिश की गई है। जदयू के एक नेता ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों को अभी जनता भूली नहीं है। इसलिए यह मुद्दे दुबारा न उठे इसलिए इन चेहरों को दूर रखने की बात जदयू और राजद की ओर से कांग्रेस को की गई थी।
कांग्रेस नेताओं से जदयू और राजद की ओर से दूरी बनाने की बात को कांग्रेस नेता शकील अहमद ने इंकार किया। उन्होंने कहा कि वह कई क्षेत्रों में अपने सहयोगी दलों के लिए प्रचार कर चुके है।
राजबब्बर और आजाद लोकप्रिय नेता हैं। इसलिए उनकी मांग दूसरों से ज्यादा हो सकती है। मगर इसका यह मतलब नहीं कि दूसरे नेताओं को चुनाव प्रचार से रोका गया है।