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Diwali 2024: भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश की जीत के लिए इस मंदिर में की गई थी पूजा, 53 साल से लगातार जारी

Thu, 31 Oct 2024 10:47 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 31 Oct 2024 10:47 AM IST
सार

बिहार में सहरसा शहर के नेताजी सुभाष चौक (रिफ्यूजी कॉलोनी चौक) पर काली पूजा को लेकर भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। मूर्तिकार द्वारा मां काली के प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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Diwali 2024 Worship was done in this temple for victory of country in Indo-Pakistani war
मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहरसा शहर के नेताजी सुभाष चौक (रिफ्यूजी कॉलोनी चौक) पर काली पूजा को लेकर भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। पूजा को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। मूर्तिकार द्वारा मां काली के प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

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कमेटी के सदस्यों ने बताया कि इस बार भी चार दिवसीय मेले का आयोजन किया गया है। 31 अक्तूबर की मध्य रात्रि प्रतिमा को प्राण प्रतिष्ठा दी जाएगी। एक नवंबर को पूजा पाठ, प्रसाद वितरण किया जाएगा। दो नवंबर को 56 भोग और तीन नवंबर को विसर्जन होगा।
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साल 1971 से शुरू है पूजा
स्थानीय लोगों ने बताया कि 53 साल पहले साल 1971 में भारत पाक युद्ध के समय बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थी के लिए भारत सरकार के द्वारा सहरसा में बसाए गए रिफ्यूजी कॉलोनी चौक पर तत्कालीन बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थी ने बंगाल एवं स्थानीय लोगों के साथ मिलकर भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की जीत की कामना को लेकर काली पूजा का आयोजन किया था। उसके बाद भारत सरकार के द्वारा पाकिस्तान का बंटवारा कर बांग्लादेश निर्माण एवं भारत की जीत के उपलक्ष्य में हर वर्ष मां काली पूजा आयोजित की जाती है।
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लोगों ने की नो एंट्री की मांग
शर्मा चौक जाने वाली बाइपास और नेताजी सुभाष चौक के मुहाने पर मंदिर होने के कारण अक्सर जाम की समस्या रहती है। नो एंट्री नहीं रहने के कारण हमेशा बड़े और भारी वाहनों का आवाजाही होते रहता है। स्थानीय लोगों एवं मंदिर कमेटी के सदस्यों ने जिला प्रशासन से कहरा कुटी से नो एंट्री लगाने की मांग की है।

Diwali 2024 Worship was done in this temple for victory of country in Indo-Pakistani war
मंदिर में खड़े पुजारी - फोटो : अमर उजाला

नया बाजार में 1970 में स्थापित वैष्णवी काली मंदिर बना है आस्था का केंद्र
सहरसा शहर के डॉक्टर्स कॉलोनी के रूप में विख्यात नया बाजार में भी धूमधाम से काली पूजा का आयोजन किया जाता है। इस स्थान पर आज मां काली का मंदिर बना है। वह पहले एक निर्जन स्थल था। इस स्थान पर शवों का दाह संस्कार होता था और यह जगह किसी के भी रुकने या जाने के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती थी।

स्थानीय बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि अक्सर शाम के बाद वहां पायल की आवाजें सुनाई देती थी। लोग अज्ञात भय से थर्राते हुए वहां से गुजरते थे। यह रास्ता सदर अस्पताल को भी जोड़ता है। लोग मजबूरी में वहां से गुजरते थे। लोगो ने बताया कि एक दिन इस विचित्र घटना की बात स्थानीय निवासी स्वर्गीय चंदू सिंह के कानों तक पहुंची। उनकी जिज्ञासा जागी और एक संकल्प लेकर उन्होंने उसी रात उस स्थान पर जाने का निश्चय किया। अंधेरी रात में वह हिम्मत के साथ वहां पहुंचे।

लोगों के अनुसार, जैसे ही वे उस स्थल के निकट पहुंचे। उन्हें एक रहस्यमयी अनुभूति हुई। उनके भीतर एक असामान्य ऊर्जा का प्रवाह महसूस हुआ। जो उन्हें बता रही थी कि यहा कोई दैवीय शक्ति विद्यमान है। उन्होंने समझा कि यहां कोई शक्ति अवश्य है, जो खुद को प्रकट करना चाहती है। अगले कुछ दिनों तक ध्यान और साधना करते हुए उन्होंने निर्णय लिया कि इस शक्ति का सम्मान करते हुए यहां मां काली की मूर्ति स्थापित की जानी चाहिए। अपने मन में यह विचार लेकर उन्होंने एक मंदिर की स्थापना का कार्य आरंभ कर दिया। धीरे-धीरे नया बाजार के लोग भी उनके इस निर्णय के साथ जुड़ते गए और सामूहिक प्रयास से वहां मां काली की प्रतिमा स्थापित की गई है। पहले हरेक साल प्रतिमा का निर्माण किया जाता था।

श्रद्धा में बदल गया लोगों का भय
मंदिर बनने के बाद से वह स्थान पवित्र और सुरक्षित महसूस होने लगा। लोगों में जो भय था वह श्रद्धा में बदल गया। अब उस स्थान से किसी अदृश्य शक्ति का भय नहीं, बल्कि मां काली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्वर्गीय चंदू सिंह की इस श्रद्धा और साहस ने उस स्थान को भय से आस्था का स्थल बना दिया। इस वर्ष 54वें काली पूजा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मेला कमेटी के अध्य्क्ष हन्नी चौधरी हैं। कौशल क्रांतिकारी सचिव के रूप में अपनी सेवाए दे रहे हैं।

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