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Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी ने 1934 में सहरसा की इस कोठी में किया था विश्राम, आजादी की लड़ाई की जगाई थी अलख

Wed, 02 Oct 2024 05:02 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 02 Oct 2024 05:02 PM IST
सार

Gandhi Jayanti 2024: सहरसा में प्रशासन की व्यवस्था के अनुसार बापू को चांदनी चौक स्थित गेस्ट हाउस में ठहराया गया, जिसे उस समय डाक बंगला कहा जाता था। गांधी जी ने यहां रात्रि विश्राम किया और शाम को स्थानीय कार्यकर्ताओं और लोगों के साथ बैठक की।

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Bihar News: Mahatma Gandhi had rested in this mansion of cin 1934, he had awakened freedom struggle
चांदनी चौक स्थित डाक बंगला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साल 1934 में बिहार में आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे राज्य में भारी तबाही मचाई थी। इस भूकंप से प्रभावित लोगों की सहायता और उनका दर्द बांटने के लिए महात्मा गांधी ने अपने सहयोगियों के साथ राज्य का दौरा किया। इसी सिलसिले में गांधी जी दरभंगा से निर्मली, सुपौल होते हुए सहरसा जिले के पंचगछिया पहुंचे थे। स्वतंत्रता सेनानी राम बहादुर सिंह ने उनके सम्मान में पंचगछिया में एक सभा आयोजित की थी, जहां गांधी जी ने लोगों को विपत्ति की घड़ी में हिम्मत रखने और स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने का आह्वान किया था।

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चांदनी चौक की कोठी में ठहरे थे बापू
इसके बाद गांधी जी सिहौल, बलुआहा, बनगांव, बरियाही होते हुए सहरसा पहुंचे। सहरसा में प्रशासन की व्यवस्था के अनुसार उन्हें चांदनी चौक स्थित गेस्ट हाउस में ठहराया गया, जिसे उस समय डाक बंगला कहा जाता था। गांधी जी ने यहां रात्रि विश्राम किया और शाम को स्थानीय कार्यकर्ताओं और लोगों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने सत्य और अहिंसा के महत्व पर जोर दिया और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का आग्रह किया। बैठक के अंत में गांधी जी ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन गाकर समापन किया।
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दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने को किया प्रेरित
महात्मा गांधी के बिहार दौरे का मुख्य उद्देश्य न केवल भूकंप पीड़ितों की मदद करना था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की भावना को भी प्रज्वलित करना था। 15 जनवरी 1934 को आए भूकंप के बाद पंचगछिया में आयोजित सभा में गांधी जी ने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। उस समय सरकारी राहत बेहद सीमित थी, ऐसे में गांधी जी ने अपने नेतृत्व से पीड़ितों का मनोबल बढ़ाया और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
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कोठी का ऐतिहासिक महत्व और सरकारी उपेक्षा
गांधी जी के सहरसा दौरे की यादगार के रूप में चांदनी चौक स्थित कोठी का विशेष स्थान है, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था। इस कोठी के प्रवेश द्वार पर संगमरमर के पत्थर पर अंकित गांधी जी के यहां ठहरने की जानकारी आज भी मौजूद है। लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाया जा सका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 18 साल पहले घोषणा की थी कि राज्य में जहां-जहां महात्मा गांधी के कदम पड़े थे, उन स्थानों को ऐतिहासिक स्मारक का रूप दिया जाएगा। परंतु इतने वर्षों बाद भी इस कोठी को सार्वजनिक धरोहर के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है।

 
सहरसा के अधिकांश लोग आज भी इस ऐतिहासिक स्थान के बारे में नहीं जानते हैं, जबकि यह गांधी जी के संघर्ष और उनके विचारों की याद दिलाने वाला स्थल है। अंग्रेजी शासनकाल में बनी यह कोठी आज उपेक्षा का शिकार है और इसे ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि महात्मा गांधी के इस दौरे ने न केवल भूकंप पीड़ितों को राहत दी, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में एक नई चेतना भी जगाई। पंचगछिया से लेकर सहरसा तक उनकी यात्रा ने बिहार के लोगों को आजादी के लिए संघर्ष करने का हौसला दिया, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है।

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