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Kolkata Case: सुपौल में निजी और सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा ठप, डॉक्टर बोले- हैवान को फांसी की सजा मिले

Sat, 17 Aug 2024 02:17 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल Published by: आदित्य आनंद Updated Sat, 17 Aug 2024 02:17 PM IST
सार

भासा के जिला सचिव डॉ विनय कुमार ने कहा कि कलकत्ता कांड किसी एक व्यक्ति की नहीं, समूह की संलिप्तता से हुआ है। ऐसे में तमाम हत्यारे को फांसी की सजा और उपद्रवियों को भी सख्त सजा मिलनी चाहिए।

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Kolkata case: OPD service stopped in private, government hospitals in Supaul, doctor said-  hang the murderer
हड़ताल पर बैठे डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हैवानियत के बाद इंडियन मेडकल एसोसिएशन सख्त रुख अपनाए हुए है। आईएमए की केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर शनिवार को सुपौल जिले के तमाम निजी और सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा ठप कर दी गई है। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी मरीजों का इलाज जारी है। इस बीच मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आईएमए ने मांगें पूरी नहीं होने पर आगे इमरजेंसी सेवा भी ठप करने के संकेत दिए हैं। शनिवार को सुपौल में आईएमए के बैनर तले डॉक्टरों ने सदर अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन किया।

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आईएमए की इस हड़ताल को भासा (बिहार स्वास्थ्य सेवा संगठन) का भी समर्थन मिला। इस दौरान आईएमए जिलाध्यक्ष डॉ शांतिभुषण ने कहा कि कलकत्ता रेप-मर्डर केस के सभी अभियुक्तों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए, इससे कम हमें स्वीकार्य नहीं है। वही इस घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर जिस प्रकार 14 अगस्त को उपद्रवियों द्वारा हमला किया गया, वह निंदनीय है। ऐसे लोगों को भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जो साक्ष्य मिटाने का प्रयास कर रहे थे। अगर यह कार्रवाई जल्द नहीं होती है तो आगे इमरजेंसी और पोस्टमार्टम सेवा को भी ठप किया जाएगा। इस दौरान आईएमए के जिला सचिव डॉ ओपी अमन, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ बीके यादव, डॉ करण अपूर्व, डॉ अभिषेक, डॉ आलोक, डॉ रामचंद्र, डॉ दिनेश, डॉ दिगंत कुमार, डॉ विमल कुमार, डॉ रंजीत कुमार सहित अन्य मौजूद थे।
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सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करे सरकार
इधर, भासा के जिला सचिव डॉ विनय कुमार ने कहा कि कलकत्ता कांड किसी एक व्यक्ति की नहीं, समूह की संलिप्तता से हुआ है। ऐसे में तमाम हत्यारे को फांसी की सजा और उपद्रवियों को भी सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को अविलंब सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना चाहिए, ताकि डॉक्टर भयमुक्त माहौल में अपनी सेवा दे सकें। क्योंकि भय के माहौल में मरीजों का उचित ईलाज संभव नहीं है।
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डॉक्टरों का साथ दे समाज, यह समाज की भी समस्या
आईएमए के संयुक्त सचिव डॉ राजाराम गुप्ता ने कहा कि महिला डॉक्टर के शरीर में 151 ग्राम सीमेन का मिलना यह साबित करता है कि हत्या से पहले और मौत के बाद तक उसके साथ गैंग रेप हुआ। उसके दोनों पैर तोड़ दिए गए और रीढ़ भी फ्रैक्चर था। यह क्रूरता की हद है। किसी भी बेटी के साथ रेप और मर्डर की घटना केवल डॉक्टर की नहीं, पूरे समाज की समस्या है। ऐसे में समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों को हमारे साथ इंसाफ की इस लड़ाई का हिस्सा बनना चाहिए। इस बार आश्वासन नहीं, इंसाफ मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।

पशुओं की तरह ले रहे डॉक्टरों से काम, यह दोहन है
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ विश्वरंजन दास ने कहा कि डॉक्टरों से लगातार 36 से 48 घंटे तक ड्यूटी ली जा रही है। यह हमारा दोहन है। हमें जीवन रक्षक बताया जाता है, लेकिन काम पशुओं की तरह लिया जाता है। जबकि सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं रहते हैं। सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट सहित तमाम मांगों पर सरकार को शीघ्र विचार करना होगा। इस बार आश्वासन नहीं, अधिकार लेंगे।


इलाज के लिए भटकते रहे मरीज और उनके परिजन
इधर, शनिवार को आईएमए की हड़ताल की वजह से मरीजों को इलाज में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोग दर दर भटकते नजर आए। पेट दर्द की शिकायत लिए पिपरा के जरौली से सदर अस्पताल पहुंचे संजय सिंह ने बताया कि 25 किलोमीटर का सफर तय कर इलाज कराने पहुंचे थे। लेकिन सरकारी सहित निजी क्लीनिक भी बंद पड़े हैं। ऐसे में किसी मेडिकल की दुकान से ही दवा लेकर काम चलाना मजबूरी है। वहीं कोसी तटबंध के अंदर बसे घुरन पंचायत से सदर अस्पताल पहुंचे मोहन कामत ने बताया कि चार दिनों से सर्दी, जुखाम और बुखार से पीड़ित हैं। कोसी तटबंध के अंदर बाढ़ की समस्या है। बावजूद किसी तरह ईलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां और प्राइवेट क्लीनिक दोनों में डॉक्टर हड़ताल पर हैं। सदर अस्पताल के इमरजेंसी में भी काफी भीड़ होने की वजह से परेशानी हो रही है।

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