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Bihar News: टीएमबीयू में लगाई गई तिलकामांझी की भव्य प्रतिमा, राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी अनावरण
Tue, 24 Jun 2025 02:42 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,भागलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,भागलपुर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Tue, 24 Jun 2025 02:42 PM IST
सार
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद तिलकामांझी की 800 किलो वजनी और 8 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। इसका अनावरण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जुलाई माह में किए जाने की संभावना है।
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तिलकामांझी की 18 फीट ऊंची प्रतिमा TMBU में स्थापित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद तिलकामांझी की 8 फीट ऊंची और करीब 800 किलो वजनी कांस्य प्रतिमा विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित की जा चुकी है। इस प्रतिमा का अनावरण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों होने की संभावना है, जिन्हें जुलाई माह में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आमंत्रित किया गया है।
राजस्थान के सुतार परिवार ने बनाई प्रतिमा
यह भव्य कांस्य प्रतिमा राजस्थान के जयपुर स्थित प्रसिद्ध सुतार परिवार द्वारा बेहद कलात्मक ढंग से निर्मित की गई है। इसे विश्वविद्यालय के तिलकामांझी पार्क में विशेष चबूतरे (पेडेस्टल) पर स्थापित किया जा रहा है। चबूतरे सहित प्रतिमा की कुल ऊंचाई लगभग 18 फीट होगी, जो दूर से ही दिखाई देगी।
अमर शहीद की स्मृति में प्रकाशित होगी विशेष स्मारिका
विश्वविद्यालय प्रशासन इस ऐतिहासिक क्षण को और भी खास बनाने के लिए अमर शहीद तिलकामांझी की स्मृति में एक विशेष स्मारिका भी प्रकाशित करेगा। साथ ही ‘तिलकामांझी पीठ’ की स्थापना की भी योजना बनाई गई है, ताकि क्षेत्रीय इतिहास और शोध को प्रोत्साहन मिल सके।
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यह भी पढ़ें: पटना में अगले दो दिनों तक भारी बारिश के आसार नहीं, कोसी और बागमती नदी उफान पर
एम्फीथिएटर और एक करोड़ की परियोजना
प्रतिमा के साथ-साथ तिलकामांझी पार्क में एक एम्फीथिएटर का निर्माण भी तेज़ी से जारी है। पूरी परियोजना पर लगभग एक करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिसमें स्थानीय जनसहयोग के साथ-साथ एनटीपीसी, कहलगांव द्वारा भी आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया है।
यूजीसी और केंद्र सरकार भी सक्रिय
राष्ट्रपति के संभावित दौरे को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और भारत सरकार भी मामले पर नज़र रखे हुए हैं। विश्वविद्यालय से उसकी ऐतिहासिक विरासत, प्रमुख उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे तैयार किया जा रहा है।
32 वर्षों बाद एक ऐतिहासिक पहल
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि लगभग 32 वर्षों बाद टीएमबीयू अपने नामकरण को सही मायनों में सार्थक करने जा रहा है। इस आयोजन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन, अधिकारी, कर्मचारी और भागलपुर की जनता बेहद उत्साहित हैं और राष्ट्रपति मुर्मू के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह क्षण न सिर्फ टीएमबीयू बल्कि पूरे अंग प्रदेश और बिहार के लिए गौरव का विषय बन गया है।
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राजस्थान के सुतार परिवार ने बनाई प्रतिमा
यह भव्य कांस्य प्रतिमा राजस्थान के जयपुर स्थित प्रसिद्ध सुतार परिवार द्वारा बेहद कलात्मक ढंग से निर्मित की गई है। इसे विश्वविद्यालय के तिलकामांझी पार्क में विशेष चबूतरे (पेडेस्टल) पर स्थापित किया जा रहा है। चबूतरे सहित प्रतिमा की कुल ऊंचाई लगभग 18 फीट होगी, जो दूर से ही दिखाई देगी।
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अमर शहीद की स्मृति में प्रकाशित होगी विशेष स्मारिका
विश्वविद्यालय प्रशासन इस ऐतिहासिक क्षण को और भी खास बनाने के लिए अमर शहीद तिलकामांझी की स्मृति में एक विशेष स्मारिका भी प्रकाशित करेगा। साथ ही ‘तिलकामांझी पीठ’ की स्थापना की भी योजना बनाई गई है, ताकि क्षेत्रीय इतिहास और शोध को प्रोत्साहन मिल सके।
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एम्फीथिएटर और एक करोड़ की परियोजना
प्रतिमा के साथ-साथ तिलकामांझी पार्क में एक एम्फीथिएटर का निर्माण भी तेज़ी से जारी है। पूरी परियोजना पर लगभग एक करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिसमें स्थानीय जनसहयोग के साथ-साथ एनटीपीसी, कहलगांव द्वारा भी आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया है।
यूजीसी और केंद्र सरकार भी सक्रिय
राष्ट्रपति के संभावित दौरे को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और भारत सरकार भी मामले पर नज़र रखे हुए हैं। विश्वविद्यालय से उसकी ऐतिहासिक विरासत, प्रमुख उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे तैयार किया जा रहा है।
32 वर्षों बाद एक ऐतिहासिक पहल
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि लगभग 32 वर्षों बाद टीएमबीयू अपने नामकरण को सही मायनों में सार्थक करने जा रहा है। इस आयोजन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन, अधिकारी, कर्मचारी और भागलपुर की जनता बेहद उत्साहित हैं और राष्ट्रपति मुर्मू के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह क्षण न सिर्फ टीएमबीयू बल्कि पूरे अंग प्रदेश और बिहार के लिए गौरव का विषय बन गया है।