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Gaya: मोक्ष नगरी में पितृ मुक्ति महापर्व का राजस्व मंत्री ने किया शुभारंभ, देश-विदेश से पहुंचे पिंडदानी
Thu, 28 Sep 2023 07:45 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Thu, 28 Sep 2023 07:45 PM IST
सार
पितरों के पिंडदान की प्रक्रिया आज से यानि 28 सितंबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर तक चलेगी। पितृपक्ष मेला में इस साल आठ लाख तीर्थ यात्रियों के आने की संभावना है। पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर तीर्थयात्रियों का आगमन प्रारंभ हो गया है।
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मेले का शुभारंभ करते मंत्री व अधिकारी।
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला (Pitru paksha Mela) शुरू हो चुका है। इसका उद्घाटन गुरुवार की शाम में राजस्व मंत्री आलोक मेहता, कृषि मंत्री सर्वजीत कुमार, एमएलसी जीवन कुमार, पूर्व मंत्री डॉ. प्रेम कुमार और सांसद विजय कुमार मांझी ने संयुक्त रूप से किया। पितरों के पिंडदान की प्रक्रिया आज से यानि 28 सितंबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर तक चलेगी।
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मेला में पिंडदान के लिए आने वाले लोगों की सुविधाओं के लिए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। पितृपक्ष मेला में इस साल आठ लाख तीर्थ यात्रियों के आने की संभावना है। उनके स्वागत के लिए मोक्ष नगरी गया (Gaya) पूरी तरह तैयार है।
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पितृपक्ष मेला की तैयारी पुख्ता
गया के विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला को लेकर जिला प्रशासन ने मेला क्षेत्र में तीर्थ यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था का दावा किया है। साथ ही मेला क्षेत्र को सजाया गया है। मेले के उद्घाटन को लेकर विष्णुपद मंदिर के प्रांगण में भव्य पंडाल लगाया गया था।
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विष्णुपद मंदिर में हुआ उद्घाटन
विष्णुपद मंदिर परिसर में बने भव्य पंडाल में मंत्रों उच्चारण के साथ पितृपक्ष मेला का शुभारंभ हो गया। इस बीच पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर तीर्थयात्रियों का आगमन प्रारंभ हो गया है। देश-विदेश से पिंडदानी कर्मकांड के लिए आने लगे हैं। वे फल्गु के पवित्र जल से पिंडदान एवं तर्पण करेंगे। इसके साथ ही पिंडवेदियों पर कर्मकांड करेंगे।
आठ लाख तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद
पिंडदान एवं तर्पण के लिए फल्गु तट पर देवघाट, ब्राह्मणी घाट, पितामहेश्वर व सीताकुंड घाट का खास महत्व है। इन घाटों पर श्रद्धालुओं कर सुविधा के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी की है। इस साल पितृपक्ष मेला में अधिक तीर्थयात्रियों के आने का संभावना है। गत वर्ष सात लाख तीर्थयात्री आए थे। इस साल आठ लाख से अधिक तीर्थयात्रियों के आने की संभावना जताई गई है।
ठहरने की क्या है व्यवस्था, जानिए
गया आने वाले तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए गांधी मैदान में 25 सौ ठहराने की व्यवस्था की है। मेला क्षेत्र में दर्जनों धर्मशालाएं व होटल भी हैं। पंडा समाज द्वारा बनाए गए निजी भवनों में भी तीर्थयात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने निजी आवासों का भी रजिस्ट्रेशन किया है।
बदली गयी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था
पितृपक्ष मेला के दौरान प्रशासन ने गया शहर के कई मार्गों की यातायात व्यवस्था में परिवर्तन किया है। मेला क्षेत्र को वन वे किया गया है। शहर में प्रात: तीन बजे से रात्रि 11 बजे तक बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चांद चौरा से विष्णुपद मंंदिर तक किसी भी वाहन के जाने की अनुमति नहीं है।
यहां कर सकते वाहनों की पार्किंग
यातायात व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए बड़े एवं छोटे वाहनों की पार्किंग के लिए सिकड़िया मोड़ बस स्टैंड, केन्दुई, पहड़तली, चंदौती बाजार, प्रेतशिला, आइटीआई कैंपस, पॉलिटेक्निक परिसर में व्यवस्था की गई है। छोटे वाहनों के लिए संक्रामक अस्पताल परिसर व पंचायती अखाड़ा में पार्किंग की व्यवस्था है।