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पितृपक्ष मेला: गयाजी में आज पांच वेदियों पर होगा पिंडदान, मौन रहकर पूरी करनी होगी धार्मिक यात्रा; जानें महत्व

Mon, 28 Sep 2026 11:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 28 Sep 2026 11:11 AM IST
सार

गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले के चौथे दिन सोमवार को पांच प्रमुख वेदियों पर पिंडदान का विधान होगा। श्रद्धालु उत्तरमानस से यात्रा शुरू कर दक्षिणमानस, कनखल, उदीची और जिह्वालोल वेदी पर पिंडदान व तर्पण करेंगे।

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Pitru Paksha Mela 2026 Pind Daan on Five Vedis in Gaya Ji Today Religious Journey Must Be Completed in Silence
गयाजी में पितृपक्ष मेला के दौरान पांच प्रमुख पिंडवेदियों पर पिंडदान करते श्रद्धालु - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मोक्षभूमि गयाजी में चल रहे विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला महासंगम में सोमवार का दिन विशेष धार्मिक महत्व लेकर आया है। मेले के चौथे और गया श्राद्ध के तीसरे दिन देश-विदेश से आए हजारों पिंडदानी आज उत्तरमानस, दक्षिणमानस, कनखल, उदीची और जिह्वालोल समेत पांच प्रमुख वेदियों पर विधि-विधान से पिंडदान करेंगे। धर्माचार्यों के अनुसार आज निर्धारित क्रम में किए गए पिंडदान से पितरों को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति और ब्रह्मलोक की प्राप्ति होने की मान्यता है।
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आज इन पांच वेदियों पर रहेगा श्रद्धालुओं का सबसे अधिक जुटान
सोमवार को पिंडदान का क्रम उत्तरमानस वेदी से शुरू होगा। इसके बाद श्रद्धालु दक्षिणमानस, कनखल, उदीची और अंत में जिह्वालोल वेदी पहुंचकर पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करेंगे। गयापाल पंडों के अनुसार यह क्रम शास्त्रों में वर्णित है और इसका पालन करना विशेष फलदायी माना गया है।
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मौन रहकर पूरी करनी होती है यह धार्मिक यात्रा
धर्माचार्यों के अनुसार उत्तरमानस पर पिंडदान के बाद दक्षिणमानस तक श्रद्धालुओं को मौन रहकर जाना चाहिए। इसे आत्मसंयम और पितरों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद अन्य वेदियों पर विधिवत पिंडदान का विधान पूरा किया जाता है।
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जिह्वालोल वेदी से जुड़ी है भगवान विष्णु की कथा
पांचों वेदियों में जिह्वालोल का विशेष महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि दैत्य वध के बाद भगवान विष्णु ने अपनी गदा इसी सरोवर में धोई थी। इसी कारण यह वेदी भगवान विष्णु से जुड़ी प्रमुख पिंडवेदियों में शामिल है और यहां पिंडदान का विशेष फल बताया गया है।

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देश-विदेश से उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
पितृपक्ष मेले में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गयाजी पहुंचे हैं। गयापाल पंडों के अनुसार लाखों श्रद्धालु अब तक मोक्षभूमि गयाजी पहुंच चुके हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार 17 दिन, पांच दिन, तीन दिन और एक दिन का पिंडदान भी कर रहे हैं।

मोक्षभूमि गयाजी में हर वेदी का अलग धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गयाजी में पिंडदान करने से पितरों को परमगति प्राप्त होती है। यही वजह है कि पितृपक्ष के प्रत्येक दिन अलग-अलग वेदियों पर निर्धारित विधान के अनुसार हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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