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कहां है समाज?: HIV संक्रमित माता-पिता की मौत हो गई, बच्ची भी संक्रमित; परिजनों ने संपत्ति हड़प सड़क पर ला दिया

Sat, 11 May 2024 07:38 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नवादा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नवादा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 11 May 2024 07:38 PM IST
सार

Nawada News: थानाध्यक्ष बसंत कुमार ने बताया कि बच्ची के माता-पिता का पूर्व में लाइलाज बीमारी से निधन हो गया था। मृतक अपने पीछे एक बच्ची को छोड़ गए, जिसे कोई घर परिवार रखने के लिए राजी नहीं हुआ। जबकि लड़की के माता-पिता अपने पीछे एक बीघा जमीन भी छोड़ गए हैं।

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Nawada: HIV infected parents died, girl child also infected; Family members grabbed property and left her
पुलिस ने बच्ची के शेल्टर होम भेज दिया है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत सरकार और बिहार सरकार एचआईवी पीड़ित मरीज और खासकर बच्चों को सहायता करने के लिए लोगों को जागरूक कर रही है। लेकिन जमीन पर कुछ और ही देखने को मिल रहा है। एचआईवी पीड़ित एक बच्ची की कहानी इतनी दर्द भरी है कि सुनने वाले की आंख भी भर  जाए। दरअसल, एक बच्ची के माता-पिता एचआईवी पीड़ित थे, इसलिए वह भी एचआईवी की शिकार हो गई। छह साल पहले माता-पिता की मौत के बाद लड़की अनाथ हो गई। अब उसकी जिंदगी नर्क बन गई है।

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दरअसल, माता-पिता की मौत के बाद जिन चाचा और चचेरे भाई को सहारा बनना चाहिए था, वे सहारा बनने के बजाय उसकी संपत्ति ही हड़प कर बैठ गए। बच्ची को खाने पीने रहने पढ़ाई और दवाई की दिक्कत हुई तो वह रोह पुलिस के शरण में पहुंची है। फिलहाल उसे शेल्टर होम में रखा गया है। यह मामला नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के मोरमा गांव का है। जहां की एक 14 वर्षीय अनाथ बच्ची ने थाने में आकर गुहार लगाई कि अब हमें किसी के पास नहीं रहना है।
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‘मुझे सुरक्षित जगह पर भेजें लड़की बोली’
मामला सामने आया तो नेहा ग्रामीण महिला विकास समिति की सोशल वर्कर रजनी कुमारी ने अनाथ लड़की से इस संबंध में जानकारी ली। पूछताछ के दौरान उसने कहा कि उसके चाचा और चचेरे भाई ठीक से नहीं रखते। वह पढ़ना चाहती है और वह जीना चाहती है। लेकिन उसका मजाक उड़ाया जाता है। पीड़ित लड़की ने कहीं सुरक्षित जगह पर पुलिस प्रशासन से भेजने की आग्रह किया है। रजनी कुमारी ने बालिका गृह से बात कर वहां रखने का अनुरोध किया। फिलहाल उसे शेल्टर होम में ही रखा गया है।
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पढ़ाई करना चाहती है बच्ची
हालांकि चचेरा भाई लड़की को रखने के लिए तैयार था, लेकिन लड़की ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि यह लोग रखना चाहते हैं, लेकिन दुख देते हैं। पढ़ाई दवाई का इंतजाम नहीं करते। लड़की ने थानाध्यक्ष के समक्ष कुछ पैसे की जरूरत बताई, जिस पर थानाध्यक्ष बसंत कुमार ने 500 की राशि अनाथ बच्ची को देकर सुरक्षित बाल गृह भेज दिया है।
 
जानकारी के अनुसार, एचआईवी एड्स के चलते बच्ची के माता-पिता का छह साल पूर्व ही देहांत हो गया था। घर में वह अकेले चाचा-चाची की शरण में रह रही थी। लेकिन उनके दुर्व्यवहार से उसके मन में भय का वातावरण उत्पन्न हो गया, जिसके बाद वह घर और चाचा को छोड़कर थाने पहुंच गई। ग्रामीणों के मुताबिक, बच्ची के माता-पिता का लाइलाज बीमारी से निधन हो गया था। इसके माता पिता लाइलाज रोग ग्रसित थे। अचानक दोनों की मौत हो गई थी।

 
थानाध्यक्ष बसंत कुमार ने बताया कि बच्ची के माता-पिता का पूर्व में लाइलाज बीमारी से निधन हो गया था। मृतक अपने पीछे एक बच्ची को छोड़ गए, जिसे कोई घर परिवार रखने के लिए राजी नहीं हुआ। जबकि लड़की के माता-पिता अपने पीछे एक बीघा जमीन भी छोड़ गए हैं।

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