Bihar: गया कॉलेज गर्ल्स हॉस्टल में भूख हड़ताल, मेस बंद और बदहाल सुविधाओं पर छात्राओं का हंगामा
गया कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में मेस बंद होने, मेस शुल्क बढ़ाने की तैयारी, गंदगी, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के विरोध में छात्राएं धरने और भूख हड़ताल पर बैठ गईं। छात्राओं का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मेस बंद कर दिया गया और बाद में केवल एक-एक पूरी देकर मामला शांत करने की कोशिश की गई।
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गया कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में अव्यवस्थाओं को लेकर छात्राओं का आक्रोश खुलकर सामने आया है। मेस बंद होने, मेस शुल्क बढ़ाने की तैयारी, गंदगी, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के विरोध में छात्राएं धरने पर बैठ गई हैं। छात्राओं का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मेस बंद कर दिया गया, जिससे उन्हें भूखे रहने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं हॉस्टल प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए पूरे विवाद के लिए छात्राओं के रवैये को जिम्मेदार ठहराया है।
मेस बंद होने से बढ़ा विरोध
धरने का नेतृत्व कर रही छात्रा ट्विंकल रक्षिता ने बताया कि यह एक सरकारी हॉस्टल है और कॉलेज खुलने तक मेस की व्यवस्था चालू रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 22 जून से हॉस्टल खुल चुका है, लेकिन भोजन की व्यवस्था बंद है। उनका आरोप है कि बिना किसी लिखित सूचना के सीधे 600 रुपये मेस शुल्क बढ़ाने की बात कही गई, जो पूरी तरह गलत है।
गंदगी और बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप
छात्राओं ने हॉस्टल की साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मेस परिसर में गंदगी फैली हुई है, शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती, कई बाथरूम महीनों से बंद पड़े हैं और पानी की टंकी खुली रहने के कारण दूषित पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। छात्राओं का दावा है कि इन समस्याओं के कारण कई छात्राओं की तबीयत भी खराब हो चुकी है।
भूख हड़ताल के बाद भी नहीं मिली पूरी व्यवस्था
छात्राओं ने बताया कि उन्होंने विरोध स्वरूप भूख हड़ताल शुरू की। इसके बाद देर रात भोजन तो उपलब्ध कराया गया, लेकिन सभी छात्राओं को केवल एक-एक पूरी देकर मामला शांत करने की कोशिश की गई। छात्राओं ने हॉस्टल संचालन की निगरानी के लिए महिला प्रोफेसरों की स्थायी समिति बनाने की भी मांग की है।
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हॉस्टल प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत
हॉस्टल के केयरटेकर मनीष प्रताप सिंह ने छात्राओं के सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि हॉस्टल में नियमित साफ-सफाई होती है। उन्होंने बताया कि पहले महिला रसोइया को छात्राओं ने पसंद नहीं किया और बाद में रखे गए पुरुष कुक पर भी झूठे आरोप लगाए गए। इससे घबराकर कुक ने नौकरी छोड़ दी, जिसके कारण कुछ समय के लिए भोजन व्यवस्था प्रभावित हुई।
मौजूदा शुल्क में बेहतर भोजन कराना मुश्किल
केयरटेकर ने कहा कि मौजूदा 1800 रुपये के शुल्क में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। गैस की कमी और कुक के अचानक काम छोड़ने की वजह से कुछ दिनों तक मेस की व्यवस्था प्रभावित रही, लेकिन मेस को स्थायी रूप से बंद नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्राएं ही रसोइयों को काम नहीं करने दे रही हैं और बातचीत के बजाय आंदोलन का रास्ता अपना रही हैं।
समाधान का इंतजार
फिलहाल गया कॉलेज गर्ल्स हॉस्टल में गतिरोध बना हुआ है। एक ओर छात्राएं लिखित आश्वासन, बेहतर सुविधाएं और मेस शुल्क बढ़ाने में पारदर्शिता की मांग पर अड़ी हैं, वहीं कॉलेज प्रशासन बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का दावा कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि छात्राओं की मांगों पर प्रशासन क्या फैसला लेता है और हॉस्टल की व्यवस्था कब सामान्य होती है।