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Bihar News: एथलीट खिलाड़ी बनने की चाह रखने वाले श्रीनिवास को मजबूरी ने बनाया किसान, अब खेती कर लाखों कमा रहे

Thu, 07 Dec 2023 01:36 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 07 Dec 2023 01:36 PM IST
सार

Bihar News: पिता के मौत के बाद श्रीनिवास को बिहार सरकार की तरफ से खिलाड़ी कोटे से सिपाही की नौकरी भी मिल रही थी। हालांकि, उन्होंने पुलिस की नौकरी करने से मना कर दिया। अपने पिता की तरह उन्होंने किसान बनना पसंद किया और आज श्रीनिवास खेती के साथ-साथ फूलों की नर्सरी व वर्मी कम्पोस्ट से लाखों रुपये कमा रहे हैं।

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Bihar News Srinivas who wanted to become an athlete became a farmer due to compulsion in gaya
किसान श्रीनिवास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गया जिले के बोधगया प्रखंड अंर्तगत पूर्वी बगदाहा गांव निवासी श्रीनिवास बचपन में पढ़ाई के समय से ही एथलेटिक्स खिलाड़ी बनना चाहते थे। यही कारण था कि विद्यालय टाइम से लेकर कॉलेज तक श्रीनिवास ने कई एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इतना ही नहीं श्रीनिवास ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई खेल प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया। 

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राष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद श्रीनिवास झारखंड के जमशेदपुर में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए प्रशिक्षण ले रहे थे। जहां उन्हें पद्मश्री पुरस्कार विजेता बगीचा सिंह और चाल्स रोमियो सिंह प्रशिक्षण देर रहे थे। उनके संरक्षण में श्रीनिवास इंटरनेशल एथलेटिक्स की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उनके पिता अचानक से किडनी की बीमारी से ग्रसित हो गए। पिता की बीमारी के कारण श्रीनिवास को घर वापस आना पड़ा।
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बिहार पुलिस में नौकरी का प्रस्ताव आया
श्रीनिवास के पिता के इलाज में 15-20 लाख रुपये खर्च हो गए। इसके बाद पैसों की तंगी के कारण श्रीनिवास को एथलिट का प्रशिक्षण छोड़ना पड़ा। बाद में उनके पिता की मौत के बाद श्रीनिवास को बिहार सरकार द्वारा खिलाड़ी कोटा में बिहार पुलिस की नौकरी का प्रस्ताव आया। लेकिन, श्रीनिवास को यह नौकरी पसंद नहीं आई और उन्होंने अपने पिता की तरह किसान बनना पसंद किया। आज श्रीनिवास की गिनती क्षेत्र के अच्छे किसान के रूप में की जाती है। श्रीनिवास खेती के साथ-साथ फूलों की नर्सरी तथा वर्मी कम्पोस्ट से प्रति वर्ष लाखों रुपये कमा रहे हैं। 
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बिहार के लिए जीता था स्वर्ण पदक
श्रीनिवास बताते हैं कि उनकी 10वीं तक की पढ़ाई गया शहर के डीएवी कैंट से हुई थी। उसके बाद वे नेशनल लेवल के एथलेटिक्स खिलाड़ी बने और झारखंड में रहकर इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। पिता के इलाज के दौरान 10-15 लाख रुपया खर्च हो गया। उसके बाद उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब हो गई। पिता की मौत के बाद घर चलाने के लिए उन्हें मजबूरी में खेती करनी पड़ी। इस वजह के उन्हें एथलेटिक्स भी छोड़ना पड़ा। श्रीनिवास 800 मीटर और 1500 मीटर के रनर थे। उन्होंने ऑल इंडिया लेवल की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व किया था और उसमें गोल्ड मेडल प्राप्त किया था।

बिहार सरकार से उन्हें कोई खास मदद नहीं मिली। श्रीनिवास के अनुसार उन्होंने मजबूरी में खेती का पेशा अपनाया। शुरू में गांव के लोग उनका मजाक उड़ाते थे कि सरकारी नौकरी को लात मार उन्होंने खेती को चुना। लेकिन उन्होंने खेती के क्षेत्र में ही कुछ नया कर गुजरने का संकल्प लिया। इसके लिए वे कई वैज्ञानिकों से भी मिले, जिनकी सहायता से उन्होंने खेती में नए-नए प्रयोग किए।

चार तरह की खेती करते हैं श्रीनिवास
श्रीनिवास ने बताया कि वे चार तरह से खेती करते हैं। एक तो जैसे आम किसान खेती करते हैं। इसके अलावा फूलों की नर्सरी और वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण करते हैं। वर्तमान में प्रत्येक महीने खेती से करीब 70 हजार रुपये कमा रहे हैं। 

बिहार सरकार दे रही थी सिपाही की नौकरी
श्रीनिवास की माने तो वे नेशनल लेवल के एथलिट थे। बिहार सरकार द्वारा उन्हें सिपाही की नौकरी दी जा रही थी। जो उन्हें अपमानजनक लगा। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को सिपाही की नौकरी सूट नहीं करती है। उनका बैकग्राउंड ठीक था। तीन भाइयों के लिए 30 एकड़ जमीन थी। अपने हिस्से की 10 एकड़ जमीन पर उन्होंने खेती शुरू की। 


गांव के किसान भी श्रीनिवास से लेते हैं सलाह
श्रीनिवास के दोस्त मंजीत सिंह ने बताया कि स्कूल में श्रीनिवास उनके सीनियर थे। स्कूल के कई प्रोग्राम में श्रीनिवास से उनकी मुलाकात हुई थी। बाद में दोनों के बीच दोस्ती हो गई। पिता की मौत के बाद से श्रीनिवास ने कृषि का कार्य शुरू कर दिया। आज यह एक अच्छे किसान बन गए हैं और अब गांव के लोग भी इनसे सलाह लेते हैं।

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