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Bihar Bypolls: मतदाताओं ने ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’ का लिया फैसला, तीन गांवों ने किया वोट बहिष्कार का एलान
Tue, 29 Oct 2024 09:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 29 Oct 2024 09:20 PM IST
सार
Bihar Assembly Bypolls: ग्रामीणों ने कहा कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी उनके गांवों में सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र और उचित जन वितरण प्रणाली की दुकान जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। इस क्षेत्र से जीतकर कई नेता बिहार विधानसभाध्यक्ष, राज्य मंत्री और केंद्रीय मंत्री तक बने, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
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ग्रामीणों ने मजबूरी में वोट न देने का कठोर फैसला किया है
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गया जिले के इमामगंज विधानसभा क्षेत्र के तीन गांवों हेरंज, पथरा, और केवलडीह के ग्रामीणों ने आगामी उपचुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। 13 नवंबर को होने वाले इस चुनाव में इन गांवों के निवासियों ने फैसला किया है कि जब तक गांवों में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलती, वे मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों की इस घोषणा ने चुनाव में खड़े प्रत्याशियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
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गांवों में सामान्य सुविधाएं भी नहीं
ग्रामीणों ने कहा कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी उनके गांवों में सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र और उचित जन वितरण प्रणाली की दुकान जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। भोला साव, अरुण भारती, ताजिब हसन और नागेश्वर यादव जैसे स्थानीय प्रतिनिधियों ने बताया कि इस क्षेत्र से जीतकर कई नेता बिहार विधानसभाध्यक्ष, राज्य मंत्री और केंद्रीय मंत्री तक बने, लेकिन गांव की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
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गांवों की स्थिति और समस्याएं
ग्रामीणों का कहना है कि हेरंज, पथरा और केवलडीह झारखंड की सीमा से लगे हैं, लेकिन बिहार का हिस्सा हैं। इस कारण से इन्हें न ही बिहार और न ही झारखंड सरकार से विशेष ध्यान मिला है। इन गांवों में राशन की दुकानें नहीं हैं, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मतदान केंद्र 11 किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे बुजुर्ग और असहाय मतदाताओं के लिए मतदान करना कठिन हो जाता है। स्वास्थ्य केंद्र 30 किलोमीटर दूर है, जिसके चलते मरीजों को सही समय पर इलाज मिलना लगभग असंभव हो जाता है।
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ग्रामीणों ने लिया कठोर निर्णय
रविवार को आयोजित एक बैठक में गांव के लोगों ने एकमत से यह निर्णय लिया कि जब तक सरकार उनके गांवों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान नहीं करती, तब तक वे किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम सरकार को उनकी स्थिति पर ध्यान देने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से लिया गया है। बैठक में दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने इस निर्णय के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की।
प्रत्याशियों के लिए चुनौती
चुनाव बहिष्कार की इस घोषणा ने चुनाव में खड़े प्रत्याशियों के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए प्रत्याशियों के सामने अब यह सवाल है कि वे किस तरह से इन गांवों के लोगों का विश्वास जीत पाएंगे।