Bihar Election: RJD को बड़ा झटका, पूर्व विधायक सुरेश मेहता BJP में शामिल, बोले- अब दिखाएंगे एनडीए की ताकत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले औरंगाबाद में महागठबंधन को करारा झटका लगा है। राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक सुरेश मेहता ने समर्थकों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। 2020 के चुनाव में औरंगाबाद जिले की सभी छह सीटों पर रणनीतिक जीत दिलाने वाले राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक सुरेश मेहता ने पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने बुधवार को समर्थकों के साथ एनडीए समर्थित भाजपा प्रत्याशी त्रिविक्रम नारायण सिंह के पिता व पूर्व राज्यसभा सदस्य गोपाल नारायण सिंह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
सुरेश मेहता ने बताई पार्टी छोड़ने की वजह
प्रेसवार्ता में सुरेश मेहता ने कहा, “उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी मेरे अभिभावक हैं। उन्होंने ही मुझे लालू प्रसाद यादव की पार्टी में शामिल कराया था और 2000 के विधानसभा चुनाव में टिकट दिलवाकर विधायक बनवाया था। उसके बाद दो बार राजद से चुनाव हारने के बावजूद मैं पार्टी में बना रहा और उसे मजबूत करने का काम करता रहा।”
उन्होंने आगे कहा, “2020 के विधानसभा चुनाव में मैं राजद का जिलाध्यक्ष था। अपनी रणनीति से मैंने महागठबंधन को औरंगाबाद की सभी छह सीटों पर जीत दिलाई। जिलाध्यक्ष न रहने के बाद भी मैंने महागठबंधन की ताकत बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नतीजा यह रहा कि औरंगाबाद और काराकाट की लोकसभा सीटों पर महागठबंधन को जीत मिली और जिले से एनडीए का सूपड़ा साफ हो गया।”
“लगातार उपेक्षा से था आहत”
मेहता ने कहा, “महागठबंधन की इस सफलता के बावजूद पार्टी में मेरी उपेक्षा शुरू हो गई। इससे मैं बहुत आहत था। जब उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मेरी उपेक्षा की जानकारी हुई, तो उन्होंने मुझसे संपर्क किया। उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने आपको सम्मान दिलाया था, अब भाजपा में आइए, यहां आपको पूरा सम्मान मिलेगा। इसके बाद मुझे गोपाल बाबू से मिलवाया गया और मुझे औरंगाबाद से भाजपा प्रत्याशी त्रिविक्रम नारायण सिंह को जिताने की जिम्मेदारी दी गई।”
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उन्होंने दावा किया, “अब मैं भाजपा में हूं और सिर्फ औरंगाबाद ही नहीं, जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर एनडीए को जीत दिलाने का काम करूंगा। यह केवल दावा नहीं, बल्कि धरातल की सच्चाई है। जैसे 2020 में मेरे नेतृत्व में महागठबंधन को छह सीटों पर जीत मिली थी, इस बार वही जीत एनडीए को मिलेगी।”
“कौरवों को छोड़ ‘पांडव’ खेमें में आए सुरेश मेहता”
पूर्व राज्यसभा सदस्य गोपाल नारायण सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा, “यह चुनाव एक चुनावी महाभारत है। जैसे धर्मयुद्ध में कौरव और पांडव दोनों को पक्ष चुनने की स्वतंत्रता थी, वैसे ही इस बार भी है। हमें खुशी है कि इस धर्मयुद्ध में सुरेश मेहता ‘पांडव’ खेमें में आ गए हैं। भाजपा में उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। उनके आने से औरंगाबाद में एनडीए और मजबूत हुआ है। एनडीए गठबंधन पूरी ताकत से औरंगाबाद की सभी छह सीटें जीतेगा और राज्य में फिर से एनडीए की सरकार बनेगी।”
“औरंगाबाद में निर्णायक साबित हो सकता है मेहता फैक्टर”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरेश मेहता का औरंगाबाद क्षेत्र में कुशवाहा समुदाय के साथ-साथ पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों में भी खासा प्रभाव है। उन्हें राजद सांसद अभय कुशवाहा के प्रभाव का जवाब माना जा रहा है। भाजपा ने मेहता को शामिल कर अभय कुशवाहा के प्रभाव को कमजोर करने का रणनीतिक कदम उठाया है।