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Election: गया टाउन विधानसभा सीट का 'चक्का जाम' बना मुद्दा; सत्ता का संग्राम में कहां फंसे मंत्री प्रेम कुमार?

Mon, 24 Mar 2025 08:19 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Mon, 24 Mar 2025 08:19 PM IST
सार

Sattar Ka Sangram: बिहार विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच 'अमर उजाला’ ने वर्चुअल 'सत्ता का संग्राम' की शुरुआत की गया टाउन सीट से। यहां के विधायक और राज्य सरकार के मंत्री डॉ. प्रेम कुमार भी 'चक्का जाम' का मुद्दा देने के लिए धन्यवाद कह गए।
 

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Bihar Assembly Election 2025 Gaya Vidhan Sabha Seat Report Political Equation Satta ka Sangram Video
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 पर सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार का गया, हिंदुओं के लिए मोक्ष की नगरी और दुनियारभर के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए परमधाम। लेकिन आप कहीं से कभी भी, कितनी भी जल्दी आ जाएं... यहां आकर जाम में फंस जाएंगे। यानी यहां आकर गाड़ी के चक्के 'जाम' होना तय है। इसका समाधान 2014 में दिया गया, लेकिन 11 साल बाद भी समाधान नहीं हुआ। डबल इंजन सरकार के रहते भी नहीं। आठ बार के गया टाउन विधायक और 2005 से अब तक पांच बार अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे डॉ. प्रेम कुमार से पूछा गया तो वह भी फंस गए। बिहार चुनाव 2025 की सुगबुगाहट के बीच 'अमर उजाला’ के पहले वर्चुअल 'सत्ता का संग्राम' में लाइव जुड़े डॉ. प्रेम कुमार ने आखिरकार बात को समझा और फिर चुनाव से पहले यह मु्द्दा देने के लिए आभार भी जताया। गया टाउन का यह काम क्यों नहीं हुआ? यह भी उन्होंने बताया और साथ ही इस दिशा में काम करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं और आम लोगों के सवालों का जवाब भी दिया।  

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जाति-धर्म नहीं, सत्ता का संग्राम में हुई विकास की बातें
चुनाव की बात हो और जाति-धर्म का मुद्दा न उठे, बिहार में ऐसा नामुमकिन हैं। लेकिन सोमवार को 'अमर उजाला’ के पहले वर्चुअल 'सत्ता का संग्राम' में ऐसा कुछ नहीं हुआ।  सिर्फ विकास को लेकर विपक्ष ने भी सवाल किया, जनता ने भी और जाहिर तौर पर हमने भी इसी पर फोकस किया। हमने जानना चाहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में गया टाउन हॉट सीट पर कौन-सा मुद्दा इस बार सामने आएगा, जिसका हल जानना जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल होगा। चर्चा में सामने आया कि यहां की सबसे बड़ी समस्या- अतिक्रमण और जाम है। इस पर चर्चा में बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री और गया टाउन से भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. प्रेम कुमार, जनता दल यूनाईटेड के जिलाध्यक्ष द्वारिका प्रसाद, राष्ट्रीय जनता दल के प्रधान महासचिव-सह-प्रवक्ता जुगनू यादव और भाजपा जिलाध्यक्ष विजय कुमार मांझी के साथ आम लोग भी शामिल हुए।
 
जनता ने बताई अपनी परेशानी
वर्चुअल 'सत्ता का संग्राम' से पहले 'अमर उजाला’ ने गया टाउन में आम लोगों से उनके मुद्दे पूछे तो सबसे ज्यादा बातें अतिक्रमण-जाम, प्रदूषण, शिक्षकों की अनुपलब्धता और पर्यटकों के आवासन के लिए आधारभूत सुविधाओं पर हुईं। इसी पर आधारित सवाल गया टाउन विधायक डॉ. प्रेम कुमार के सामने रखे गए तो उन्होंने कहा कि गया शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से शहर के माड़नपुर बाइपास, मानपुर, बंधुआ स्टेशन और बागेश्वरी गुमटी के पास ओवरब्रिज के निर्माण कराए जा रहे हैं। साथ ही गया जिले में मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना पर भी काम हो रहा है। प्रदूषण की रोकथाम के लिए पौधारोपण किए गए हैं। रामशिला और ब्रह्मयोनि पहाड़ पर हरियाली विकसित करने की दिशा में काफी काम हुआ है।



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बात जब जाम और उसकी वजह पर आकर टिकी तो उन्होंने कहा कि शहर को अतिक्रमण मुक्त करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की नहीं है। गया नगर निगम को अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराना चाहिए। यह नगर निगम की जिम्मेदारी है। निगम सरकार को फुटपाथी दुकानदारों को वेंडिंग जोन बनाकर देने चाहिए थे, लेकिन नगर निगम ने अपने कर्तव्यों का निर्वाह नहीं किया। उन्होंने इस आरोप को स्वीकार किया कि इसकी वजह से आज सड़क जाम की समस्या नासूर बन गई है। उन्होंने नगर निगम पर समस्या का ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि वह उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रही है। इसके कारण गया शहर आज तक स्मार्ट सिटी नहीं बन सका है। गया नगर निगम को जो काम करना था, वह वो नहीं कर रही है। जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा कि वे बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी जनता को सच बताने का काम करेंगे।

 
विपक्षी दल बोले- डबल इंजन की सरकार बात बनाने में है आगे
शहर में सड़क जाम के सवाल पर राजद के प्रधान महासचिव-सह-प्रवक्ता जुगनू यादव ने कहा कि बिहार में डबल इंजन की सरकार है। ये लोग बात बनाने में माहिर हैं। गया शहर में विष्णुपद मंदिर सनातनियों का मुख्य केंद्र है। एनडीए के लोग सनातन के नाम पर सत्ता पर काबिज तो हो जाते हैं, लेकिन विकास नहीं होता है। लालू राज में गया शहर के करीमगंज के पास पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्तमान में जाम की समस्या से निपटने के लिए इन लोगों के पास कोई योजना नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रजनीश कुमार ने कहा कि बिहार सरकार चाहती तो जाम की समस्या खत्म हो जाती, लेकिन वह इसके प्रति गंभीर नहीं है। गया टाउन पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। लोगों को 1990 के दशक में कांग्रेस का काम याद है, लेकिन 2005 से अब तक का कोई काम नहीं दिख रहा है। बातें खूब हो रही हैं। लोग परेशान हैं। जन-जीवन अस्त-व्यस्त है।
 
सत्तासीन दलों ने याद दिलाया- राजद के शासनकाल में होता था तांडव
जदयू के जिलाध्यक्ष द्वारिका प्रसाद ने कहा कि गया को 1977 से जानता हूं। 1990 के दशक में शिक्षा के नाम पर तांडव होता था। आज शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पितृपक्ष मेला के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के लिए टेंट सिटी का निर्माण कराया। पर्यटकों के आवासन की दिशा में भी सरकार कई प्रोजेक्ट लेकर आई है। सरकार ने गया शहर के लोगों के घर तक गंगाजल पहुंचाने का काम किया है। पहले अधिकारी मुख्यमंत्री के लिए क्या करते थे, यह बताने की जरूरत नहीं है। आज गया के डीएम किस तरह काम कर रहे हैं, वह भी देखने वाली बात है।
 
भाजपा के जिलाध्यक्ष विजय कुमार मांझी ने अतिक्रमण के सवालों का जबाब देते हुए कहा कि राजद के शासनकाल में अतिक्रमण हुआ है। शहर को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए सरकार काम कर रही है, लेकिन कई जगह तो राजद के दिग्गज नेता ही कब्जा करने वालों के समर्थन में आंदोलन करने के लिए सड़क पर उतर जा रहे हैं। सरकार इन सभी का इलाज कर रही है। अपराधियों को बख्शा नहीं जा रहा है। शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं की जा रही, बल्कि इनसे स्कूल अवधि में अध्यापन का काम भी कराया जा रहा है। माहौल में सुधार के कारण ही सैलानियों का आना बढ़ा है।
 
आम लोगों ने गया टाउन विधायक से सीधे मांगा जवाब
मनोज कुमार अस्थाना, काजल कुमार और उपेंद्र सिंह आदि ने जाम की समस्या के अलावा एयरपोर्ट के मुद्दे पर सीधे भाजपा विधायक डॉ. प्रेम कुमार से सवाल पूछे। यह भी सवाल किया गया कि आखिर गया में हवाई सेवाओं की  सुविधा कम क्यों है? इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने केंद्र सरकार की विमानन क्षेत्र की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी।

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