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बिहार में गंगा का रौद्र रूप: पांच साल में एक किमी जमीन नदी में समाई, 300 घरों पर मंडराया खतरा

Mon, 28 Sep 2026 02:11 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: पटना ब्यूरो Updated Mon, 28 Sep 2026 02:11 PM IST
सार

बाढ़ के चिरैया और हरनहिया दियारा में गंगा के लगातार कटाव से ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों के अनुसार पांच वर्षों में करीब एक किलोमीटर जमीन नदी में समा चुकी है। करीब 300 घर कटाव की जद में हैं। ग्रामीणों ने स्थायी समाधान के लिए भारी पत्थर के बोल्डर लगाने की मांग की है।

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दियारा के ग्रामीण गंगा नदी के भीषण कटाव से दहशत में हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाढ़ अनुमंडल के बख्तियारपुर प्रखंड अंतर्गत चिरैया पंचायत के चिरैया और हरनहिया दियारा के ग्रामीण गंगा नदी के भीषण कटाव से दहशत में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में गंगा कटाव के कारण लगभग एक किलोमीटर तक जमीन नदी में समा चुकी है। स्थिति यह है कि एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में बसे इन दोनों गांवों के घरों तक अब गंगा का पानी पहुंच गया है, जिससे लगभग तीन सौ घर सीधे तौर पर इस कटाव से प्रभावित हैं।

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कटाव की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा अब तक जो उपाय किए गए हैं, वे नाकाफी साबित हुए हैं। पानी के तेज बहाव और लगातार हो रहे भूमि कटाव के कारण लोगों के आशियाने उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि छोटी बालू भरी बोरियां डालने के बजाय स्थायी समाधान के लिए मौके पर भारी पत्थर के बोल्डर लगाए जाएं, ताकि कटाव के वेग को रोका जा सके और गांव को बचाया जा सके।

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संतोष कुमार ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से हमारी जमीन लगातार गंगा में समा रही है। घरों से लगभग दो-चार फीट की दूरी तक कटाव आ चुका है और हम हर पल डर के साये में जीने को मजबूर हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कई घर गंगा में समा जाएंगे। वह प्रशासन से मांग करते हैं कि छोटी बोरियों से काम चलाने के बजाय पत्थर के बोल्डर लगवाए जाएं।

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माया देवी ने कहा कि 30 वर्ष पहले ही उनके पति की मौत हो गई थी। इस साल बाढ़ आने के बाद सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं की गई है और न ही कोई राशन दिया गया है। वह झोपड़ी में रहती हैं और वह भी इस कटाव के दायरे में है।


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रमिया देवी ने कहा कि यह बहुत गंभीर समस्या है। कटाव से हादसे की आशंका बनी रहती है। कभी भी कोई बच्चा इसमें गिर सकता है। यहां पत्थर के बोल्डर लगाकर कटाव को रोका जाना चाहिए।

संतोष पोद्दार ने कहा कि चिरैया गांव में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर मंदिर का निर्माण शुरू किया है। अब तक मंदिर में लगभग दस लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और मंदिर का एक चौथाई हिस्सा मिट्टी के कटाव की चपेट में आ चुका है। इस पर जल संसाधन विभाग को तत्काल काम शुरू करना चाहिए और मंदिर को बचाना चाहिए।

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