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Hindi News ›   Bihar ›   Former Union Minister RCP Singh rues `witch hunt' in JD(U)

RCP Singh: कभी नीतीश के करीबी रहे आरसीपी सिंह समर्थकों पर कार्रवाई से आहत, कहा- मेरे नजरिए में नहीं आएगा बदलाव  

Thu, 07 Jul 2022 11:00 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Amit Mandal Updated Thu, 07 Jul 2022 11:00 PM IST
सार

उन्होंने राजनीति में अपने उदय को भी स्वीकार किया और याद करते हुए कि 2010 में जद (यू) में शामिल होने के तुरंत बाद उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। 

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Former Union Minister RCP Singh rues `witch hunt' in JD(U)
रामचंद्र प्रसाद सिंह - फोटो : ANI

विस्तार

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने गुरुवार को जद (यू) में मनमानी कार्रवाई किए जाने पर अफसोस जताया, जिसके परिणामस्वरूप उनके कई वफादारों को बर्खास्त कर दिया गया था। सिंह के खिलाफ यह धारणा बनने लगी थी कि वह अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद नहीं रह गए हैं, उनपर कार्रवाई की गाज गिराई गई। राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले सिंह अपने गृह राज्य की यात्रा पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।

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अजय आलोक सहित कई पर गिरी गाज
जद (यू) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष से पिछले महीने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आधार पर प्रवक्ता अजय आलोक और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों जैसे नेताओं के निष्कासन के बारे में पूछा गया था। पार्टी में लोगों को शामिल करने या निष्कासित करने में मेरी ज्यादा भूमिका नहीं है। लेकिन मुझे कहना होगा कि किसी भी संगठन में इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा मैं एक सकारात्मक दृष्टिकोण वाला एक सीधा-सादा व्यक्ति हूं और मेरे इन लक्षणों में कोई बदलाव नहीं आएगा। मैं अपने अनुभव का उपयोग किसानों और बेरोजगार युवाओं को आवश्यक कौशल से लैस करने के लिए करूंगा। उन्होंने राजनीति में अपने उदय को भी स्वीकार किया और याद करते हुए कि 2010 में जद (यू) में शामिल होने के तुरंत बाद उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। 
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नीतीश कुमार को दिया राजनीतिक सफलता का श्रेय
सिंह ने अपनी राजनीतिक सफलता का श्रेय नीतीश कुमार के साथ अपनी निकटता को दिया, जिनका विश्वास उन्होंने एक आईएएस अधिकारी के रूप में अर्जित किया था जब नीतीश रेल मंत्री थे। 2005 में नीतीश कुमार के बिहार के सीएम बनने के बाद यूपी कैडर के अधिकारी सिंह को यहां लाया गया और उन्हें अपना शक्तिशाली प्रधान सचिव बनाया गया। सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने तक सिंह इसी पद पर बने रहे। सिंह कम से कम पिछले साल जनवरी तक नीतीश कुमार के भरोसेमंद बने रहे जब मुख्यमंत्री ने उन्हें पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया और वह कई साल तक इस पद पर रहे। 
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हालांकि, राजनीतिक हलकों में यह माना जाता है कि सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के कुछ महीनों के भीतर कुमार को विश्वास में लिए बिना केंद्रीय कैबिनेट का पद स्वीकार कर लिया। लेकिन भाजपा के सबसे बड़े सहयोगी होने के बावजूद नीतीश को इस पर कुछ आपत्ति थी। नीतीश कुमार के पुराने राजनीतिक सहयोगी राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई। पार्टी ने उन्हें लगातार तीसरी बार राज्यसभा में भेजने से इनकार कर दिया। नीतीश ने अपनी झारखंड इकाई के प्रमुख खीरू महतो को ऊपरी सदन का टिकट दे दिया। 

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