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Bihar Politics: नई सोच के साथ प्रशांत किशोर ने शुरू की जन सुराज यात्रा, कहा- कुछ परिवारों में सत्ता का केंद्रीकरण राजनीति के लिए अभिशाप

Mon, 30 May 2022 12:20 AM IST
देव कश्यप पीटीआी, हाजीपुर (बिहार)
पीटीआी, हाजीपुर (बिहार) Published by: देव कश्यप Updated Mon, 30 May 2022 12:20 AM IST
सार

प्रशांत किशोर ने कहा कि "बिहार 1960 के दशक तक सबसे अच्छे शासित राज्यों में से एक था। 1960 के दशक के अंत में चीजें कमजोर हो गईं और 1990 के दशक तक हम सभी विकास सूचकांकों के मामले में सबसे नीचे आ गए। इस अवधि की विशेषता वाली सबसे बड़ी चीज राजनीतिक अस्थिरता थी।

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Former Election strategist Prashant Kishor identifies concentration of power in some families as bane of Bihar politics
Prashant Kishor - फोटो : ANI

विस्तार

पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने रविवार को कहा कि उनके गृह राज्य बिहार में "जड़त्व" की स्थिति ने राजनीति को खराब कर दिया है, जहां पिछले तीन दशकों में सत्ता की स्थिति सिर्फ 1200-1300 परिवारों के बीच केंद्रित रही है।

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प्रशांत किशोर ने कहा कि "बिहार 1960 के दशक तक सबसे अच्छे शासित राज्यों में से एक था। 1960 के दशक के अंत में चीजें कमजोर हो गईं और 1990 के दशक तक हम सभी विकास सूचकांकों के मामले में सबसे नीचे आ गए। इस अवधि की विशेषता वाली सबसे बड़ी चीज राजनीतिक अस्थिरता थी। 23 वर्षों की अवधि (1967-1990) में बिहार ने 20 से अधिक सरकारें देखीं।" 
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ काम कर चुके किशोर ने दोहराया कि राज्य की स्थिति ठीक करने लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है "भले ही हम नीतीश जी के सुशासन के दावों और लालू जी के सामाजिक न्याय के सच दावों पर विश्वास करें। 
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किशोर ने कहा, "मैंने राजनीतिक पहल के लिए बिहार को क्यों चुना, इसका कारण सिर्फ यह नहीं है कि यह मेरा राज्य है... सबसे पहले, यहां हम एक ऐसे पैमाने पर सत्ता का केंद्रीकरण देखते हैं जिसमें कुछ समानताएं हैं। जरा कल्पना कीजिए कि ऐसे राज्य में जहां लगभग तीन करोड़ परिवार हैं। पिछले 30 वर्षों में सिर्फ 1200-1300 राजनीतिक परिवारों में से ही विधायक, सांसद और मंत्री रहे हैं, चाहे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई भी रहा हो।

प्रशांत किशोर ने शुरू की जन सुराज यात्रा
प्रशांत किशोर ने बिहार के हाजीपुर से रविवार को 'जन सुराज यात्रा' की शुरुआत कर दी है। यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यात्रा की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वैशाली लोकतंत्र की धरती है, इसलिए जन सुराज यात्रा की शुरुआत के लिए यह सबसे योग्य स्थान है।

उन्होंने कहा कि बिहार में नई राजनीतिक व्यवस्था बनाने की सोच के साथ यह प्रयास शुरू किया गया है। पिछले चार से पांच दिन पूर्व तक मुझसे से मिलने वालों की संख्या 18 हजार थी, जो कि बढ़कर 60 हजार हो गई है। यह वैसे लोग हैं जिन्होंने खुद हमसे मिलने के लिए संपर्क किया या हमारी टीम के लोगों ने उनसे संपर्क किया था। 


उन्होंने बताया कि वैशाली से शुरू जन सुराज यात्रा के दौरान सितंबर के अंत तक बिहार के सभी जिलों में गोष्ठी के माध्यम से लोगों से मुलाकात की जाएगी। प्रशांत ने बताया कि वैशाली जिले में चार दिनों तक करीब 350 किलोमीटर एरिया कवर कर जिले के सभी 16 प्रखंड और आठ विधानसभा में करीब 40 स्थानों पर गोष्ठी के माध्यम से लोगों से मिलकर जन सुराज के प्रयासों को बताया जाएगा। यात्रा की समाप्ति के बाद दो अक्टूबर को गांधी आश्रम चंपारण से 'पदयात्रा' की शुरुआत की जाएगी। करीब तीन हजार किलोमीटर पदयात्रा बिहार के सभी जिलों में की जाएगी। प्रशांत ने कहा कि पदयात्रा में करीब 12 से 15 महीने लग सकते हैं।

उन्होंने बताया कि बेंगलुरु और तमिलनाडु चुनाव के परिणाम के बाद दो मई 2021 को बिहार में एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाने को लेकर निर्णय लिया गया था। एक साल तक पदयात्रा के माध्यम से लोगों से मिलकर उनकी समस्या को लेकर एक ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। बिहार में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क समेत 15 समस्याओं को लेकर एक्सपर्ट से मिलकर ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। समस्या के निपटारे का ब्लू प्रिंट बिहार के लोगों के सामने रखा जाएगा। 

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