फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Final verdict of Patna High court on Bihar Caste census by CM nitish kumar bihar govenment after entrim order

Bihar Caste Census : पटना हाईकोर्ट से जनगणना को हरी झंडी; इसे सर्वे की तरह कराने के लिए सरकार को मिली मंजूरी

Tue, 01 Aug 2023 01:11 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Tue, 01 Aug 2023 01:11 PM IST
सार

Bihar News : अंतरिम फैसला भले बिहार सरकार के खिलाफ था, लेकिन अंतिम फैसला पक्ष में आ गया। पटना हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट बिहार में जाति आधारित सर्वे को हरी झंडी दे दी है। उसे जनगणना की तरह नहीं, सर्वे की तरह करना है। कोई दबिश नहीं।

विज्ञापन
Final verdict of Patna High court on Bihar Caste census by CM nitish kumar bihar govenment after entrim order
पटना हाईकोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नौ या छह- बिहार में यह कहावत खूब चलती है। मंगलवार को पटना हाईकोर्ट अपने अंतरिम फैसले से आगे अंतिम फैसले में यही करेगा। हाईकोर्ट ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट की दी तारीख के अंदर बिहार में जातीय जनगणना को लेकर उठ रहे सवालों पर सुनवाई कर ली। चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन व जस्टिस पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने लगातार पांच दिनों तक (3 जुलाई से लेकर 7 जुलाई तक) याचिकाकर्ता और बिहार सरकार की दलीलें सुनीं। कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना बताने वालों की भी पूरी दलील सुन ली और फिर सरकार के उस दावे का पक्ष भी सुना, जिसके अनुसार यह जाति आधारित सर्वे है। आज पटना हाईकोर्ट ने सीएम नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने इसे सर्वे की तरह कराने की मंजूरी दे दी है। जल्दी ही बिहार सरकार फिर से जातीय जन-जनगणना शुरू करवाएगी। हालांकि कोर्ट के इस फैसले से याचिकाकर्ता नाखुश हैं। उनका कहना है कि अब वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इधर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद बिहार सरकार ने फिर से जाति जनगणना शुरू कराने का एक आदेश जारी किया। इसमें लिखा है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद सभी जिलों के डीएम को जाति आधारित गणना फिर से शुरू करने के दिशा-निर्देश दिया जाता है। 

विज्ञापन


अंतिम फैसला आए बिना सुप्रीम कोर्ट में नहीं होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को तीसरी बार बिहार की जाति आधारित जन-गणना के केस को पटना हाईकोर्ट के पास भेजा था। दो बार जनहित के नाम पर याचिका पहुंचने पर सुप्रीम न्यायालय ने इसे हाईकोर्ट का केस बताते हुए वापस किया था। इसके बाद पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और यहां 04 मई को अंतरिम फैसला राज्य सरकार के खिलाफ आया। कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए 04 मई तक जुटाए सभी डाटा को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। पटना हाईकोर्ट से अपने खिलाफ अंतरिम आदेश को देखकर बिहार की नीतीश सरकार अगली तारीख का इंंतजार किए बगैर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा- “पटना हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले में काफी हद तक स्पष्टता है, लेकिन अंतिम फैसला आए बगैर सुप्रीम कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होगी। 
विज्ञापन


जानिए, आदेश का असर और ऑनलाइन डाटा की स्थिति
पटना हाईकोर्ट ने 04 मई को अंतरिम आदेश दिया और कुछ ही घंटे में सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर तमाम जिलाधिकारियों के जरिए गणना में लगे सारे कर्मियों तक एक लाइन का मैसेज पहुंच गया कि डाटा को यथास्थिति सुरक्षित किया जाए। इसके बाद क्या हुआ? दरअसल, भले ही सरकार ने 80 प्रतिशत काम पूरा होने की बात की है लेकिन सच्चाई यही है कि यह आंकड़ा कागज पर जानकारी जुटाने वालों का है। मतलब, 80 फीसदी के करीब लोगों की जानकारी पेपर पर ली गई है। जमा की गई  जानकारी (डाटा) का औसतन 25 फीसदी भी अभी ऑनलाइन अपलोड नहीं हुआ है। जिस सरकारी सर्वर की बात सरकार ने की है, उसकी जगह ज्यादातर डाटा अभी पेपर पर ही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed