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बिहार चुनाव से गायब है उत्सव का माहौल, टिकट के लिए भी मारामारी कम
Sun, 27 Sep 2020 07:03 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 27 Sep 2020 07:03 AM IST
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लालू यादव, नीतीश कुमार
- फोटो : SELF
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पिछली बार के मुकाबले इस बार पढ़ना का चुनावी माहौल सूना-सूना सा लग रहा है। टिकट दावेदारों का हुजूम सड़कों से गायब है। पहले कोई ढोल नगाड़ों के साथ टिकट की दावेदारी करने आता था तो कोई गाजे-बाजे व तामझाम के साथ। लेकिन इस बार गाड़ियों के काफिले भी नहीं इस बदले मिजाज का असर कारोबार पर भी हुआ है।
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होटल से लेकर बैनर होर्डिंग का कारोबार प्रभावित
पिछले चुनाव को याद करें तो चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही टिकट के दावेदार अपने समर्थकों के साथ पटना में डेरा जमा लेते थे। पटना पहुंचे यह सियासी लोग अलग-अलग होटल में एक साथ कई रूम बुक करवाते थे। इस बार ऐसा नहीं है। इसलिए होटल का कारोबार भी प्रभावित है। यही नहीं विधायक फ्लैट और पार्टियों के कार्यालय के नजदीक की खाली दुकानें भी सूनी पड़ी है। झंडा बेचने और प्रचार सामग्री की दुकानों पर भी कम लोग दिख रहे हैं।
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सिर्फ पटना ही नहीं बिहार के तमाम शहरों का यही हाल है। पोस्टर, बैनर, हैंडबिल और कैलेंडर छापने वालों का भी कारोबार इस बार न के बराबर है। इतना ही नहीं चुनाव प्रचार के लिए गाड़ियों की बुकिंग अभी शुरू नहीं हो सकी है।
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वर्चुअल प्रचार पर जोर
चुनाव के दौरान कमाई की उम्मीद पाले कारोबारी इस बार निराश हैं। कोरोना के कहर ने कारोबार को लगभग रोक सा दिया है। नेता भी वर्चुअल प्रचार पर ही ज्यादा जोर दे रहे हैं। पूर्वी चंपारण जिले के चकिया में पेट्रोल पंप का संचालन करने वाले डॉक्टर गौरव मिश्रा बताते हैं कि चुनाव के दौरान डीजल और पेट्रोल की मांग काफी बढ़ जाती थी। इस बार पहले से ही मांग कम है।