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बच्चों के इलाज में बेच दिया सबकुछ, अब इस शापित जिंदगी से मुक्ति के लिए पीएम को लिखा खत
Sat, 13 Jul 2019 12:23 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासाराम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासाराम
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 13 Jul 2019 12:23 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pexels.com
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बिहार के सासाराम के रोहतास जिले में एक पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इच्छामृत्यु के लिए खत लिखा है। सरकार उनके तीन बेटों का इलाज कराने में नाकाम रही है जिससे दुखी होकर उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उनके तीनों जन्मजात बेटे दुर्लभ मांसपेशियों की बीमारी से पीड़ित है जिसकी वजह से वह छोटी सी उम्र में लकवा के शिकार हो गए हैं।
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जमीनरहित इस किसान का नाम देवमुनि सिंह यादव है जो छुलकर गांव के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि उनके पास जो कुछ था उसे वह तीनों बेटों- मंतोष (14), धंतोष (11) और रामतोष (7) के इलाज में गंवा चुके हैं लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। इस बीमारी के लिए महानगरों के विशेष अस्पताल में उपचार की आवश्यकता है और उनके पास संसाधन नहीं हैं।
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राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें केवल झूठे आश्वासन दिए। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह किसान अब एक झोंपड़ी में पत्नी, बेटी और शारीरिक रूप से अक्षम तीन बेटों के साथ रहने को मजबूर है। बेटों के इलाज में वह अपनी 10 कठ्ठा पैतृक खेती की जमीन, चार दशमलव गृहस्थ भूमि को बेच चुके हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य इस श्रापित जिंदगी को जीना नहीं चाहता।
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यही वजह है कि किसान ने पीएम मोदी से इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी है। उनके लिए 2012 तक सबकुछ ठीक था। अचानक उनके बड़े बेटे मंतोष के हाथ और पांव में असामान्य परिवर्तन आने लगे। उस समय उसकी उम्र केवल आठ साल थी। उन्होंने कहा, 'उसके हाथ-पांव पतले और कमजोर होते गए जिसके कारण वह बेड से उतर नहीं पाता था। शुरू में मैंने सासाराम में डेहरी में एक फिजियोथेरेपिस्ट के अलावा स्थानीय तांत्रिकों और डॉक्टरों से संपर्क किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।'
कुछ पैसा इकट्ठा करने के बाद यादव अपने बेटे को वाराणसी के बीएचयू अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उन्हें कुछ महंगे टेस्ट करवाने को कहा। पैसा खत्म होने के बाद उनके पास इलाज को बीच में छोड़कर वापस आने के अलावा कोई और चारा नहीं था। डॉक्टरों के अनुसार, रोगी के शरीर की नसों में रक्त परिसंचरण बंद हो गया है और उसे लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता है।
छह महीने बाद यादव के दूसरे बेटे धंतोष में इस बिमारी के लक्षण दिखाई देने लगे। दो बेटों का इलाज का खर्च उठाने में विफल रहने पर उन्होंने अपनी खेती योग्य 10 कट्ठा पैतृक जमीन बहुत सस्ते दामों में बेच दी। वह अपने दो बेटों के इलाज के लिए डॉक्टरों के पास भाग रहे थे। इसी बीच 2017 में उन्हें तीसरा झटका लगा और उनका तीसरा बेटी भी इस बिमारी की चपेट में आ गया।
बेटों की बीमारी में यादव को घर, जमीन, जेवरात और अन्य कीमती सामान बेचने पड़े। इस कारण अब उन्हें एक झोपड़ी में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। यादव के परिवार का नाम बीपीएल सूची में नहीं है। इसी कारण उन्हें महत्वकांक्षी आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। आयुष्मान योजना लाभार्थी को मुफ्त में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती है।