भाजपा- जेडीयू के बीच नहीं है सबकुछ ठीक, लालू मामले में नीतीश की पार्टी ने मांगी पीएम मोदी से सफाई
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बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच का गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बंद कमरे में हुई बैठक के बाद एक बार फिर से दोनों पार्टियों के बीच की खाई सामने आने लगी है। जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने भाजपा और उसकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया है।
लालू यादव को जेल होने और भ्रष्टाचार के कई मामलों में फंसे होने के बाद भी उनके पूरे परिवार के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने को लेकर संजय सिंह ने आज कई सवाल दागे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से इसमामले में सफाई मांगी है।
एक न्यूज चैनल से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार लालू यादव की पार्टी से उनके व परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से ही नाता तोड़ा था। अब पूरे मामले को एक साल से अधिक हो गया है लेकिन उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है।
भ्रष्टाचार के जिस घोटाले के मुद्दे पर बिहार में सरकार गिरी, उस रेलवे टेंडर घोटाले के केस की फाइल की रफ्तार बेहद सुस्त है। यही नहीं सीबीआई ने टेंडर घोटाले में रेलवे के एक अधिकारी बी के अग्रवाल पर केस चलाने की इजाजत के लिए रेलवे बोर्ड के प्रिंसपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विजिलेंस को चिट्ठी लिखी थी। तीन महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक बी के अग्रवाल के खिलाफ केस चलाने की अनुमति रेलवे ने नहीं दी गई है। इससे अब यह साफ हो गया है कि लालू पर कार्रवाई का मामला पूरी तरह से फिक्स है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से रेलवे टेंडर घोटाले में ढिलाई बरती जा रही है उसके बाद अब कोई संदेह नहीं रह गया है।
भ्रष्टाचार मामले में अंदर तक शामिल बताए जा रहे लालू यादव, उनके परिवार और जुडे़ लोगों पर जिस तरह से कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है उससे शक और गहरा गया है। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने यह चिट्ठी इस साल 14 अप्रैल को रेलवे बोर्ड के प्रिंसपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विजिलेंस को लिखी थी। इस चिट्ठी में सीबीआई ने तत्कालीन ग्रुप जनरल मैनेजर और मौजूदा रेलवे बोर्ड के एडिशनल मेंबर के तौर पर काम कर रहे बी के अग्रवाल के खिलाफ केस चलाने की अनुमति मांगी थी।
तीन महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक रेलवे ने किसी तरह की अनुमति नहीं दी है। अगर रेलवे ने अनुमति दे दी होती तो आरोपियों को कोर्ट आना पड़ता और आरोप तय होते। सीबीआई को अगर रेलवे से अनुमति मिल गयी होती तो आरोपियों की गिरफ्तारी तक हो सकती थी। जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है वो गैर जमानती धाराएं हैं, जाहिर है इससे लालू, राबड़ी और तेजस्वी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाती। लेकिन अभी तक कुछ भी ऐसा नहीं हुआ है।
लालू यादव पर क्या हैं आरोप
जब लालू यादव रेल मंत्री थे तब उनपर टेंडर निकालने से लेकर सुजाता ग्रुप को रेलवे का होटल दिलाने के कई आरोप लगे हैं। यही नहीं उनपर होटर से जुड़े विज्ञापन और टेंडर की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगे हैं। यह भी कहा जाता रहा है कि लालू अन्य टेंडर भर रहे लोगों को टेंडर न भरने की धमकी पोन करके दी थी। होटल की जमीन उन्होंने अपने करीबी को दी। उसके बाद आरोप यह बी लगा कि उनके करीबी ने कंपनी के शेयर राबड़ी देबी और तेजस्वी को बेची