नेताओं के बिगडै़ल बोल पर चुनाव आयोग ने चेताया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेताओं के बिगड़े बोल ने चुनाव आयोग की चिंता बढ़ा दी है। बिगड़ैल बोल पर लगाम कसने के लिए आयोग ने राजनैतिक दलों को नसीहत देते हुए कहा है कि वे मर्यादित परंपरा का निर्वहन कर भविष्य के चुनावों के लिए नजीर पेश करें।
आयोग ने बिहार में चुनाव लड़ रहे राजनैतिक दलों के नेताओं और उम्मीदवारों को सख्त दिशा-निर्देश भी दिए हैं। बताया जा रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों और उनके नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयानों से आयोग काफी दुखी है और उस पर गहरायी से नजर रखे हुए है।
नेताओं के भाषण के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए आयोग ने कहा है कि 17 सितंबर को जारी सलाह के बावजूद भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।
आयोग ने दोबारा से सियासी दलों को दिशा-निर्देश भेजे हैं। आयोग ने नेताओं और उनके भाषणों का गहरा अवलोकन करने के बाद यह कदम उठाया है।
बयान नफरत के साथ दुर्भावना फैलाने वाले
आयोग ने राजनैतिक दलों से कहा है कि उनके बयान आपसी द्वेष,मतभेद और नफरत के साथ दुर्भावना फैलाने वाले हैं। साथ ही धर्म जाति और समुदाय के आधार पर दिए जाने वाले बयान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन भी हैं।
राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों को नसीहत देते हुए आयोग ने उन्हें यह याद दिलाया है कि वे संविधान में प्रदत मौलिक अधिकार के अनुच्छेद 19 (1) में चिन्हित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ख्याल रखें और शालीनता के साथ नैतिकता की सीमाओं का ध्यान रखें। आयोग ने सभी राजनैतिक पार्टियों से अपील की है कि वो अपना व्यवहार ऐसा रखें जो आने वाले चुनावों के लिए मिसाल बन सके।
दरअसल बिहार चुनाव के शुरूआती दौर में ही बिगडै़ल बोल का आलम इतना परवान चढ़ गया है कि नेताओं की ओर से व्यक्तिगत तौर पर बयानबाजी की जा रही है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने भाषण में लालू यादव को चारा चोर करार दे डाला। तो लालू ने भी शाह को नरभक्षी बताया। सिलसिला यहीं नहीं थमा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लालू पर सियासी वार के क्रम में शैतान शब्द का इस्तेमाल कर डाला।
लालू ने भी पलटवार कर उन्हें ब्रम्हपिशाच करार दिया है। बताया जा रहा है कि इन बयानों के मद्देनजर ही आयोग सख्ती दिखाते हुए दोबारा से दिशा-निर्देश जारी किए हैं।