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Hindi News ›   Bihar ›   ED attached property worth Rs 4.53 crores of Baccha Rai, the mastermind of Bihar Topper Scam 2016

प्रवर्तन निदेशालय ने कसा शिकंजाः बिहार टॉपर घोटाले के आरोपी बच्चा राय की संपत्ति हुई जब्त

Sat, 31 Mar 2018 12:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Updated Sat, 31 Mar 2018 12:38 PM IST
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ED attached property worth Rs 4.53 crores of Baccha Rai, the mastermind of Bihar Topper Scam 2016
बच्चा राय - फोटो : फाइल फोटो

बिहार के बहु चर्चित टॉपर घोटाले मामले की जांच कर रही ED के हाथ बड़ी कामयाबी मिली है। घोटाले के मास्टरमाइंड बच्चा राय पर शिकंजा कसते हुए ED ने उनकी करोड़ों की संपत्तियों को जब्त किया है। विशुणदेव राय कॉलेज के कर्ता धर्ता बच्चा राय की 4.53 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। बच्चा राय पर आरोप है कि उन्होंने अपने स्कूल के बच्चों को टॉप कराने के नाम पर पैसे लिए हैं। 

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जानकारी के मुताबिक बच्चा राय ने अपने बच्चों और पत्नी के नाम से संपत्तियां खरीदी हैं। पूछताछ में बच्चा राय ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि उनके पास इन संपत्तियों को खरीदने के लिए राशि कहां से आई।  
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बच्चा राय की जिन संपत्तियों पर ईडी की नजर पड़ी है, उनमें हाजीपुर, भगवानपुर और महुआ के 29 प्लॉट शामिल है। इसके अलावा बच्चा राय के हाजीपुर स्थित दो मंजिला मकान और पटना के एक फ्लैट को भी अटैच किया गया है। 

प्रवर्तन निदेशालय ने बच्चा राय के 10 बैंक खातों की सीज किया है। उसके ट्रस्ट की जांच चल रही है। साल 2016 में हुए इस घोटाले में बिहार सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लोकेश्वर सिंह के साथ 4 कॉलेजों के प्रधानाध्यापकों को गिरफ्तार किया गया था। जिनमें बच्चा राय का नाम भी शामिल था। बच्चा राय जेल में हैं और सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी थी। 


वैशाली जिले में विशुण राय कॉलेज के प्रमुख बच्चा राय ने टॉपर छात्रों के परिजनों की तरफ से पैसे दिए और उनके पेपर भी लिखवाए। इस मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब बोर्ड के टॉपर छात्र सौरभ श्रेष्ठ और छात्रा रूबी राय का इंटरव्यू हुआ। इस इंटरव्यू में रूबी राय इंटरमीडिएट में अपने विषयों की जानकारी भी नहीं दे पाई थी और पॉलिटिकल साइंस को 'प्रॉडिकल साइंस' बताया था। इस खुलासे के बाद बिहार की शिक्षा व्यवस्था और कॉलेज में हो रही धांधली पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। जिसके बाद राज्य सरकार ने इस घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन दिया। तब से ही इस मामले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। 
 

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