Hindu Rituals : बिहार में चीनी नागरिक का दाह-संस्कार, अस्थियां बांधकर ले गए परिजन; ऐसा ही होता है चीन में?
Bihar News : देश में अवैध तरीके से नेपाल के रास्ते घुसकर बिहार पहुंचे चीनी नागरिक ली जियाकी की मौत के करीब डेढ़ महीने तक शव को सुरक्षित रखा गया। गुरुवार को जब मुजफ्फरपुर में परिवार ने अंत्येष्टि की और अस्थियां ले गए तो लोग चकित थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
क्या चीन में भी हिंदुओं की तरह शव का दाह-संस्कार होता है? क्या वहां भी अस्थियों का महत्व है? क्या चीन के भी लोग आत्मा और पुनर्जन्म का सिद्धांत मानते हैंं? यह सवाल पिछले डेढ़ महीने से बिहार के मुजफ्फरपुर में चर्चा का विषय था। किसी चीनी नागरिक की पहली बार मौत यहां हुई थी और 11 जून से शव सुरक्षित रखा गया था। नेपाल के रास्ते भारत में अवैध तरीके से घुसकर बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे ली जियाकी की मुजफ्फरपुर में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। भारत आने से लेकर ली जियाकी की मौत तक बहुत कुछ अलग हुआ, लेकिन जब शव के अंतिम संस्कार में हिंदुओं की तरह दाह-संस्कार की प्रक्रिया हुई तो लोग देखते रह गए। दरअसल, चीन में पहले कैफीन में दफनाने और दाह-संस्कार, दोनों की परंपरा थी; लेकिन अब जगह के अभाव में दाह-संस्कार ही चलन में है। हिंदुओं की तरह ही वहां आत्मा की शांति और अस्थियों के लिए पूरी प्रक्रिया होती है।
भारत की तरह चीनी नागरिक का हुआ अंतिम संस्कार
इस संबंध में स्थानीय लोगों ने बताया कि आज चीनी नागरिक ली जियाकी के परिजन आए और शहर के सिकंदरपुर में स्थित मुक्ति धाम में उनके शव का लगभग भारतीय पद्धति से ही दाह-संस्कार किया। यह देखकर लोग हैरान हो रहे थे। शव का पहले चीनी पद्धति से पूजन किया गया, फिर उनका अंतिम संस्कार किया गया- जैसे भारत में होता है। अंतिम संस्कार के बाद जियाकी की अस्थियों को एक बर्तन में लेकर परिजन चले गए। चीन में भी भारत की तरह ही सबसे बड़ा बेटा अस्थि कलश घर ले जाता है, हालांकि वहां एक अन्य परंपरा के तहत दूसरा बेटा या सबसे बड़ा पोता मृतक की तस्वीर ले जाता है। भारत में अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को गंगा नदी या प्रयागराज के संगम में प्रवाहित करते हैं, लेकिन चीन में अस्थि-कलश को या तो घर की पैतृक वेदी पर रखा जाता है या वहां के धार्मिक स्थल या पैतृक हॉल में पैतृक पट्टिका पर स्थापित किया जाता है। परिवार के सदस्य और दोस्त पैतृक वेदी या उस स्थान पर भोजन और जोस की छड़ें चढ़ाने सहित अनुष्ठान करके मृतकों को सम्मान देते हैं।
पकड़े जाने के अगले ही दिन खुद को घायल कर लिया था
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में 62 वर्षीय ली जियाकी को पकड़ा गया था। अवैध रूप में देश में प्रवेश करने के मामले में जियाकी को जेल भेजा गया। जेल में जाने के अगले ही दिन जियाकी ने खुद को जख्मी कर लिया था। केंद्रीय कारा के बंदी के रूप में श्रीकृष्ण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान में 11 जून को उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी पर चीनी दूतावास के लोग पहुंचे और ली जियाकी के बैग, कपड़े व रुपये को रिसिव कर लिया था। पड़ताल में पता चला कि नेपाल का वीजा लेकर वह बीते एक जून को नेपाल पहुंचा था। इसके बाद नेपाल बॉर्डर से बस पकड़ कर बिना वीजा के ही अवैध रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर में पहुंच गया। उसके पास से एक काला रंग का बैग मिला, जिसमें उसका चीनी पासपोर्ट, एक स्क्रीन टच मोबाइल फोन, एक सफेद रंग का मोबाइल चार्जर, एक बस टिकट, चाइनीज भाषा में छपा विजिटिंग कार्ड आदि तो था ही, चीनी मुद्रा भी बरामद की गई थी। अन्य सामान की पड़ताल में एक ट्रिमिंग मशीन, चीन का एक नक्शा, तीन पत्थर की छोटी मूर्तियां आदि की बरामदगी हुई थी।
परिजनों ने कहा- नेपाल या भारत आने की जानकारी नहीं थी
मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी अवधेश दीक्षित ने कहा कि बीते माह इलाज के दौरान मौत के बाद चीनी नागरिक ली जियाकी का शव सुरक्षित रखा गया था। चीनी अधिकारियों ने परिजनों के आने की जानकारी दी थी। आज परिजन आए है और शहर के सिकंदरपुर स्थित मुक्ति धाम में चीनी पद्धति से पूजन और अन्य प्रक्रिया के बाद शव का दाह-संस्कार कराया गया है। परिजन अस्थियां भी लेकर गए हैं। परिजनों ने 'अमर उजाला' से बातचीत में सिर्फ इतना ही कहा कि ली जियाकी बिना बताए भारत आए थे। नेपाल आने की भी जानकारी परिजनों को नहीं थी।