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Bihar: भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी का प्लेटिनम जुबली कांफ्रेंस शुरू, सीएम नीतीश के कृषि सलाहकार रहे उपस्थित
Thu, 20 Mar 2025 04:47 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Thu, 20 Mar 2025 04:47 PM IST
सार
Bihar: इस कांफ्रेंस में 20 से अधिक राज्यों के 250 से ज्यादा वरीय वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। तीन दिनों तक सांख्यिकी के विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। इस चर्चा के निष्कर्षों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा और नीति निर्माताओं के साथ साझा किया जाएगा।
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तीन दिवसीय प्लेटिनम जुबली कांफ्रेंस शुरू हुआ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में गुरुवार को भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी का तीन दिवसीय प्लेटिनम जुबली कांफ्रेंस शुरू हुआ। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार और भारत सरकार के पूर्व कृषि सचिव डॉ. मंगला राय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. मंगला राय ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सांख्यिकी की अहम भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि विज्ञान और विकास की प्रगति के लिए डाटा और उसके विश्लेषण की जरूरत होती है। कृषि क्षेत्र में शोध और नीति निर्माण के लिए सांख्यिकी की जानकारी आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों से एकजुट होकर कार्य करने की अपील की और विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना की।
कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय का संबोधन
कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने कहा कि सांख्यिकी विशेषज्ञों को डाटा की सत्यता को लेकर सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इसका दुरुपयोग भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय डिजिटल एग्रीकल्चर पर विशेष जोर दे रहा है और जल्द ही दस से अधिक सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी।
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भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी के प्रेसिडेंट डॉ. पद्म सिंह का वक्तव्य
डॉ. पद्म सिंह ने बताया कि इस सोसायटी की स्थापना सर सी. वी. रमन के निर्देश पर की गई थी और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इसके पहले सचिव थे। उन्होंने कहा कि कृषि विकास में सोसायटी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कार्यक्रम में कॉलेज ऑफ बेसिक साइंस के डीन डॉ. अमरेश चंद्रा ने स्वागत भाषण दिया। मंच संचालन डॉ. ऋतंभरा और डॉ. अंजनी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महेश कुमार ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय कुमार, निदेशक शिक्षा डॉ. उमाकांत बेहरा, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. मयंक राय, निदेशक बीज डॉ. डी. के. राय सहित कई शिक्षक, वैज्ञानिक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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डॉ. मंगला राय ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सांख्यिकी की अहम भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि विज्ञान और विकास की प्रगति के लिए डाटा और उसके विश्लेषण की जरूरत होती है। कृषि क्षेत्र में शोध और नीति निर्माण के लिए सांख्यिकी की जानकारी आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों से एकजुट होकर कार्य करने की अपील की और विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना की।
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कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय का संबोधन
कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने कहा कि सांख्यिकी विशेषज्ञों को डाटा की सत्यता को लेकर सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इसका दुरुपयोग भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय डिजिटल एग्रीकल्चर पर विशेष जोर दे रहा है और जल्द ही दस से अधिक सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी।
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भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी के प्रेसिडेंट डॉ. पद्म सिंह का वक्तव्य
डॉ. पद्म सिंह ने बताया कि इस सोसायटी की स्थापना सर सी. वी. रमन के निर्देश पर की गई थी और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इसके पहले सचिव थे। उन्होंने कहा कि कृषि विकास में सोसायटी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कार्यक्रम में कॉलेज ऑफ बेसिक साइंस के डीन डॉ. अमरेश चंद्रा ने स्वागत भाषण दिया। मंच संचालन डॉ. ऋतंभरा और डॉ. अंजनी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महेश कुमार ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय कुमार, निदेशक शिक्षा डॉ. उमाकांत बेहरा, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. मयंक राय, निदेशक बीज डॉ. डी. के. राय सहित कई शिक्षक, वैज्ञानिक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।