Bihar Weather: पछुआ हवा से बढ़ी ठंड, घने कुहासे ने समस्तीपुर में जनजीवन किया अस्त-व्यस्त; किसानों को यह सलाह
Samastipur Weather: समस्तीपुर में पछुआ हवा और घने कुहासे से ठंड बढ़ गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने 21 दिसंबर तक ठंड बढ़ने का पूर्वानुमान जारी किया है और किसानों के लिए फसल व पशुपालन संबंधी सलाह दी है।
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विस्तार
समस्तीपुर और आसपास के इलाकों में चल रही पछुआ हवा के कारण ठंड में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सुबह से ही घना कुहासा छाया हुआ है, जिससे दृश्यता कम हो गई है और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। सड़कों पर आवाजाही धीमी हो गई है और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
कुहासे के कारण जनजीवन प्रभावित
घने कुहासे के कारण सुबह के समय स्कूल, दफ्तर और बाजार जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वाहनों की रफ्तार कम हो गई है और कई स्थानों पर लोग अतिरिक्त सावधानी बरतते नजर आए।
21 दिसंबर तक ठंड बढ़ने का पूर्वानुमान
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने 21 दिसंबर तक के लिए मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार उत्तर बिहार के जिलों में ठंड बढ़ने की संभावना जताई गई है। इस अवधि में औसतन 3 से 5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चलने की उम्मीद है।
21 दिसंबर के बाद मिल सकती है राहत
मौसम विभाग के अनुसार, 21 दिसंबर से हवा का रुख पूरवा होने के बाद ठंड से कुछ राहत मिलने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 24 से 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।
आर्द्रता और तापमान का हाल
पूर्वानुमान अवधि में सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 85 से 95 प्रतिशत और दोपहर में 40 से 45 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। बीते 24 घंटे के दौरान समस्तीपुर का अधिकतम तापमान 24.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 9.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
किसानों के लिए जारी की गई मौसम आधारित सलाह
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल सत्तार ने बदलते मौसम को देखते हुए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि किसान भाई गेहूं की पछात किस्म की बुवाई 25 दिसंबर से पहले अवश्य पूरी कर लें, क्योंकि इसके बाद बुवाई करने पर उपज में भारी कमी आ सकती है।
गेहूं और सब्जी फसलों को लेकर सुझाव
जिन किसानों की गेहूं की फसल 21 से 25 दिन की हो गई है, उन्हें सिंचाई के साथ नाइट्रोजन खाद का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। टमाटर की फसल में फल छेदक कीट की विशेष निगरानी की जरूरत बताई गई है, क्योंकि इसके पिल्लू फल के अंदर घुसकर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके नियंत्रण के लिए खेतों में पक्षी बसेरा बनाने की सलाह दी गई है।
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आलू, प्याज और दलहन फसलों पर ध्यान
आलू की फसल की निकौनी करने और जिन किसानों के प्याज के पौधे 50 से 55 दिन के हो गए हैं, उन्हें रोपाई करने की सलाह दी गई है। रोपाई के समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी कम से कम 15 सेंटीमीटर रखने को कहा गया है। मटर, टमाटर, बैंगन और मिर्च जैसी सब्जी फसलों में फल छेदक कीट का प्रकोप दिखने पर दवा के छिड़काव की बात कही गई है।
पशुपालन को लेकर विशेष सावधानी की अपील
ठंड के मौसम में दुधारू पशुओं की देखभाल और पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। पशुओं के आहार में तिलहन और अनाज की मात्रा बढ़ाने, जई और बरसीम जैसे पौष्टिक हरे चारे की व्यवस्था करने को कहा गया है। पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए प्रोबायोटिक दवाओं के उपयोग के साथ खनिज और विटामिन मिश्रण 50 ग्राम प्रति पशु प्रतिदिन देने की सलाह दी गई है।
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