Bihar: कामेश्वर धार्मिक न्यास ट्रस्ट के अगले ट्रस्टी होंगे कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह, कोर्ट का आया फैसला
Bihar: कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महारानी अधिरानी कामसुन्दरी देवी के निधन के पश्चात, कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह ही कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के ट्रस्टी होंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज परिवार के सदस्यों को ही ट्रस्टी बनने का अधिकार है।
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विस्तार
दरभंगा सिविल कोर्ट के अवर न्यायाधीश नवम् कुमार रितेश कुमार ने कामेश्वर सिंह दरभंगा धार्मिक न्यास से संबंधित 47 साल पुराने मुकदमे में फैसला सुनाया है। यह मामला 1978 में दर्ज किया गया था। दरभंगा के राजकुमार स्वर्गीय शुभेश्वर सिंह के पुत्र राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह ने महारानी अधिरानी कामसुन्दरी देवी एवं अन्य के खिलाफ हकीयत वाद संख्या 45/1978 दर्ज कराया था।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महारानी अधिरानी कामसुन्दरी देवी के निधन के पश्चात, कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह ही कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के ट्रस्टी होंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज परिवार के सदस्यों को ही ट्रस्टी बनने का अधिकार है और वे भविष्य में ट्रस्ट का निरीक्षण तथा लेखा-जोखा प्राप्त करने के अधिकारी होंगे।
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महत्वपूर्ण निर्देश
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ट्रस्टी द्वारा मैनेजर को दी गई पावर ऑफ एटॉर्नी के आधार पर ट्रस्ट की भूमि और जेवरातों की बिक्री बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं होगी। यदि ऐसा किया गया तो इसे अमान्य माना जाएगा।
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SBI की मुख्य शाखा के लॉकर में रखे जेवरातों को भी न्यायालय की अनुमति के बिना नहीं निकाला जा सकता।
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महारानी अधिरानी कामसुन्दरी देवी को निर्देशित किया गया है कि वे मंदिर के पुजारी का भुगतान, राजभोग, उत्सव और अन्य धार्मिक कर्तव्यों का पालन करती रहें।
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भविष्य में यदि राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह को ट्रस्ट के प्रबंधन में कोई गड़बड़ी लगे, तो वे अदालत में राहत की मांग कर सकते हैं।
बतातें चले कि महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह ने इस धार्मिक न्यास का पंजीकरण 16 मार्च 1949 को किया था। न्यास का उद्देश्य दरभंगा, मुजफ्फरपुर और भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित राज टेंपल में नियमित पूजा, राजभोग, उत्सव, मरम्मत और रख-रखाव सुनिश्चित करना था।