Bihar: दरभंगा में राहुल को रोकने की कोशिश पर डॉ. शकील का तंज, कहा- 'सरकार डरी हुई', भारत-पाक मुद्दे पर भी बोले
Bihar: डॉ. शकील ने कहा कि राहुल गांधी को रोकने की कोशिश से जो संदेश जनता में गया है, उसका राजनीतिक खामियाजा नीतीश सरकार को भुगतना पड़ेगा। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की बात पर राहुल गांधी खुद कह चुके हैं कि ऐसे 30 मुकदमे पहले से दर्ज हैं, जो उनके लिए मेडल की तरह हैं।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री डॉ. शकील अहमद सोमवार को दरभंगा पहुंचे। यहां कांग्रेस जिलाध्यक्ष दयानंद पासवान, डॉ. इरशाद आलम और अन्य कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. शकील अहमद ने कहा कि बिहार सरकार राहुल गांधी से डर गई है। इसी वजह से दरभंगा में आयोजित "शिक्षा न्याय संवाद" कार्यक्रम में बाधा पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि तमाम अड़चनों के बावजूद राहुल गांधी अंबेडकर छात्रावास पहुंचे और छात्रों से संवाद करने में सफल रहे।
डॉ. शकील ने कहा कि राहुल गांधी को रोकने की कोशिश से जो संदेश जनता में गया है, उसका राजनीतिक खामियाजा नीतीश सरकार को भुगतना पड़ेगा। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की बात पर राहुल गांधी खुद कह चुके हैं कि ऐसे 30 मुकदमे पहले से दर्ज हैं, जो उनके लिए मेडल की तरह हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसकी नीयत सही नहीं है और वह लोकतांत्रिक मूल्यों को दबाने की कोशिश कर रही है।
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मोदी सरकार पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उठाए सवाल
डॉ. शकील अहमद ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ चार दिन तक चले युद्ध में भारतीय सेना ने बहादुरी के साथ जवाब दिया, लेकिन अमेरिका के दबाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक लड़ाई रोक दी। उन्होंने कहा कि जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब 1971 में युद्ध तब तक चला जब तक पाकिस्तान ने घुटने नहीं टेक दिए और 95 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण नहीं कर दिया। इसलिए आज भी लोग इंदिरा गांधी को याद करते हैं।
शिमला समझौते का उल्लंघन बताया अमेरिकी हस्तक्षेप
डॉ. शकील ने अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा मध्यस्थता की बात कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1972 में हुआ शिमला समझौता स्पष्ट रूप से कहता है कि कश्मीर के मुद्दे पर भारत-पाक के अलावा किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी। लेकिन इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति खुलेआम कह रहे हैं कि उन्होंने हस्तक्षेप कर युद्ध रुकवाया। यह भारत के परंपरागत विदेश नीति के रुख का सीधा उल्लंघन है।