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बिहार पुलिस पर आरोप: भूस्वामी को 23 घंटे हिरासत में रखा, दबंगों से जमीन पर कब्जा करवाया, पूछने पर इनकार कर रहे
Thu, 16 Jan 2025 03:12 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
Published by: अरविंद कुमार
Updated Thu, 16 Jan 2025 03:12 PM IST
सार
दरभंगा पुलिस पर यह भी आरोप है कि वह अपने थाना क्षेत्र से बाहर की जमीन पर कब्जा दिलवाने में दबंगों की सहायता किए हैं। फिलहाल, पूरे मामले में पुलिस सहयोग करने की बात से इनकार कर रही है।
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विश्वविद्यालय थाना, दरभंगा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दरभंगा जिले में विश्वविद्यालय थाने की पुलिस पर एक भूस्वामी को 23 घंटे तक पूछताछ ले लिए हिरासत में लिए जाने के नाम पर दबंगों द्वारा उसके जमीन पर कब्जा करवाने का मामला सामने आया है। पुलिस पर यह भी आरोप है कि वह अपने थाना क्षेत्र से बाहर की जमीन पर कब्जा दिलवाने में दबंगों की सहायता किए हैं। इधर, 23 घंटे बाद पुलिस हिरासत से छूटने के बाद जब पीड़ित अपने घर लौटा तो देखा कि उसके जमीन को दबंगों द्वारा चारदीवारी देकर घेर लिया गया है।
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अब पीड़ित आवेदन लेकर वरीय पुलिस पदाधिकारियों के पास न्याय की गुहार लगाता फिर रहा है। हालांकि, पूछे जाने पर विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि उसे हिरासत में नहीं लिया गया था। सिर्फ पूछताछ कर थोड़ी देर में ही छोड़ दिया गया था। यह पूछने पर की कब्जा की गई जमीन आपके थाना क्षेत्र में आती है तो उन्होंने कहा कि नहीं, मेरे क्षेत्र में नहीं आती है।
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मामला मब्बी थाना क्षेत्र के हनुमान मंदिर के पीछे का है, जहां बैकुंठ नायक अपना घर बनाकर रहते हैं। उन्होंने इस जमीन को 15 अक्तूबर 2021 को अपने पत्नी गीता देवी के नाम से एक कट्ठा 11 धुर जमीन खरीदा था। इसके बाद उसने घर बनाया, जबकि आगे से नौ धुर जमीन खाली पड़ी थी, जिसे विश्वविद्यालय थाना के सहयोग से दबंगों द्वारा कब्जा करवा दिया गया है। अब मामले की शुरुआत विश्वविद्यालय थाना पिछले आठ जनवरी को उस समय करती है, जब पीड़ित बैकुंठ नायक विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित अपने सत्तू दुकान पर दुकानदारी कर रहे थे।
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इस दौरान पुलिस उन्हें हिरासत में ले लेती है और कहती है, तुम्हारे जमीन से शराब की बरामदगी हुई है। थाना की पुलिस उसे थाना में लाकर कम्प्यूटर वाले रूम में बंद कर देती है। लेकिन कोई पूछताछ नहीं करती है। जब दूसरे दिन उसे नहीं छोड़ा गया और न ही कोर्ट भेजा गया तो उसके बेटे श्रीराम नायक ने वरीय पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर पूरी घटना की जानकारी दी।
जैसे ही वरीय अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया कि अगले दिन नौ जनवरी शाम को बैकुंठ नायक को छोड़ दिया गया। लेकिन पुलिस अब भी पिता पुत्र दोनों से सादे पेपर पर हस्ताक्षर करवाना चाह रही थी। जब इन दोनों ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया तो पुलिस ने दोनों की जमकर पिटाई कर दी, जिससे दोनों पिता पुत्र जख्मी हो गए। किसी तरह दोनों थाने से छूटने के बाद डीएमसीएच में इलाज करवाया, उसके बाद जब वह अपने घर गए तो देखा कि खाली नौ धुर जमीन पर मोहल्ले के दबंगों दिलीप मंडल और अभिषेक मंडल ने पुलिस के सहयोग से चहारदीवारी घेरकर कब्जा कर लिया है।
इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि उसे शराब के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसे कुछ देर बाद ही छोड़ दिया गया था। जमीन पर कब्जा दिलाने की बात कह रहा है, वह जमीन मेरे थाना क्षेत्र में नहीं है, जिस जमीन की वह बात कह रहा है, उस जमीन को उसने मंदिर को दान में दे चुका है। वह गलत व्यक्ति है। हालांकि, पूछने पर उन्होंने कहा कि उसके जमीन से शराब की बरामदगी हुई थी। इसी मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।