फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   dalit suport to ex cm jitanram manjhi

बिहार: आखिर कितने पानी में है मांझी की नाव ?

Thu, 19 Mar 2015 01:20 PM IST
नीरज सहाय, पटना / बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
नीरज सहाय, पटना / बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए Updated Thu, 19 Mar 2015 01:20 PM IST
विज्ञापन
dalit suport to ex cm jitanram manjhi

बिहार की राजधानी पटना के उत्तर में श्रीपालपुर गाँव के लोग पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को मुख्य मंत्री पद से हटा दिए जाने के कारण दुखी हैं और उनमें रोष है।

विज्ञापन


सुमंत रविदास नाराजगी भरे लहजे में कहते हैं, "जीतन मांझी को सीएम नीतीश कुमार ने बनवाया, लेकिन उनको हटवाया काहे? बार-बार बेइज्जत काहे करवाए? जब हटाने था त सीएम काहे बनाए?" जवाब भी खुद ही देते हैं और कहते हैं, "हरिजनवा के पंखा-बिजली माफ करना उनको खराब लगा का?" वे 'मांझी जिंदाबाद' कहते हैं और चले जाते हैं।

विज्ञापन

जेडीयू का तीर

dalit suport to ex cm jitanram manjhi

परशुराम राम कहते हैं, "उनके कार्यकाल के दौरान निचले तबके को सुविधा मिली। सरकार त ठीके चला रहे थे, फैसला भी व्यावहारिके था। लेकिन, बरबस हटा दिए।"

इन लोगों से बातचीत करने से लगता है कि मांझी भले ही सत्ता से बेदखल कर दिए गए हों, लेकिन दलितों-महादलितों और गरीबों में उन्हें पसंद करने वाले लोग मौजूद हैं। लेकिन सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह इस बात से सहमत नहीं लगे। उनके अनुसार, जीतन राम मांझी को लेकर एक भ्रम था।

बिहार की राजनीति

dalit suport to ex cm jitanram manjhi

वशिष्ठ नारायण सिंह बताते हैं कि मांझी के एक दर्जन सिपहसलार ऐसे हैं, जिन्होंने विश्वासमत के दौरान अपनी सदस्यता बचाने के लिए पार्टी लाइन पर वोट किया। दलितों के लगभग 16 प्रतिशत एकमुश्त वोट पर जेडीयू की नज़र को ध्यान में रखकर उन्हें नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी बनाया गया था।

शोध संस्थान एशियन डेवेलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सदस्य-सचिव प्रोफेसर शैबाल गुप्ता कहते हैं, "मांझी के चलते बिहार की राजनीति मे दलित मुद्दा आगे नहीं आया। बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश के द्वारा महादलित एजेंडे को सशक्त ढंग से रखने का परिणाम जीतन राम मांझी हैं।"

विज्ञापन

नए सहयोगी

dalit suport to ex cm jitanram manjhi

अब शासन तंत्र के बिना वे दलित एजेंडा को आगे रखने में कितना सफल होंगे यह देखना होगा। सत्तारूढ़ जेडीयू को आगामी चुनाव में इससे नुकसान होने की संभावना है। महादलितों की नाराजगी को ध्यान में रखते हुए ही शायद जेडीयू के नए सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता भी उनकी घर वापसी की बात बार-बार कह रहे हैं।

पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी के अनुसार, जीतन राम मांझी की छवि उत्तर भारत के एक स्वाभिमानी दलित नेता के रूप में उभरी है। इनकी लोकप्रियता का ख़ामियाजा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आगामी विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

बिहार की राजनीति में भरेंगे नए रंग

dalit suport to ex cm jitanram manjhi

पूर्व मुख्यमंत्री मांझी ने बिहार के दलितों को नया राजनीतिक तेवर देने के लिए 28 फरवरी को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) का गठन कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

उनका मोर्चा कब पार्टी में तब्दील होगा और किसके साथ गठबंधन करेगा, यह अभी तय नहीं है। लेकिन इतना तय है कि अगले विधान सभा चुनाव में महादलित बिहार की राजनीति में नए रंग जरूर भरेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed