सरकार ने दी नाम काटने की धमकी, कोर्ट ने किया मुख्य सचिव को तलब
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बिहार शराबबंदी के समर्थन में 21 जनवरी को दुनिया की सबसे बड़ी मानव श्रृंखला बनाने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्लान को सफल बनाने में लगे अधिकारी जहां स्कूली बच्चों को इसमें शामिल नहीं होने पर स्कूल से नाम काटने की धमकी दे रहे हैं, वहीं पटना हाईकोर्ट ने बच्चों के मामले में दिए गए इस धमकी पर तल्ख टिप्पणी की है।
कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान कहा कि शराबबंदी तो ठीक है लेकिन, शराबबंदी के नाम पर राज्य सरकार स्कूली बच्चों को मानव श्रृंखला में क्यों शामिल कर रही है। जवाब में सरकार की ओर से अपर महा अधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि बच्चों को जबरन कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है।
उन्हें वालंटियर के रूप में योगदान करने को कहा गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि सासाराम में डीईओ ने बच्चों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी मानव श्रृंखला में शामिल होने का आदेश दिया है। यहां तक कि शामिल नहीं होने पर नामांकन रद्द करने की बात भी कही है।
कोर्ट में मौजूद रहें मुख्य सचिव और डीजीपी
पूरे मामले की जानकारी के लिए कोर्ट ने शुक्रवार को बिहार सरकार के मुख्य सचिव और डीजीपी को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया है। इस मामले की सुनवाई अब कल दोपहर बाद 10.30 बजे होगी।
उल्लेखनीय है कि सासाराम (रोहतास) के डीईओ (जिला शिक्षा पदाधिकारी) ने 17 जनवरी को सभी स्कूलों के हेड मास्टर के नाम जारी आदेश में कहा जा रहा है कि सभी हेड मास्टर यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके स्कूलों में पढऩे वाले सभी बच्चे अपने माता-पिता के साथ आवश्यक रूप से भाग लेंगे।
आदेश यहीं खत्म नहीं हो जाता है। आगे लिखा है कि मानव श्रृंखला में शामिल न होने पर सरकार के निर्देश की अवहेलना माना जाएगा, साथ ही मानव श्रृंखला में भाग न लेने पर छात्रों का नामांकन अवैध माना जाएगा और वैसे छात्रों को लाभ से वंचित किया जाएगा।