Bihar: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाल सोना की खेप बरामद, गंडक के रास्ते उत्तर प्रदेश में ले जा रहे थे तस्कर
तस्कर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से काटकर गंडक के रास्ते उत्तर प्रदेश में ले जा रहे 65 बोटा लाल सोना के नाम से जाने जाने वाला खैर की लकड़ियों को उत्तर प्रदेश में वन विभाग ने जब्त किया है। खैर की लकड़ी काफी महंगी होती है।
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बिहार में लाल सोना के नाम जाने जाने वाली लकड़ी को वन विभाग ने वाल्मिकी नगर टाइगर रिजर्व (वीटीआर) इलाके से बरामद किया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के हनुमानगंज गांव के मुसहरी टोला के पास छितौनी तटबंध से की गई है। दरअसल, तस्कर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से काटकर गंडक के रास्ते उत्तर प्रदेश में ले जा रहे 65 बोटा लाल सोना के नाम से जाने जाने वाला खैर की लकड़ियों को उत्तर प्रदेश में वन विभाग ने जब्त किया है। खैर की लकड़ी काफी महंगी होती है। इसकी कीमत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसे लाल सोना का भी दिया गया है।
जंगल की सुरक्षा पर सवाल
इधर, लकड़ी के अवैध कटान से जंगल की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है। वीटीआर या सोहगीबरवा के जंगल से लकड़ी काटे जाने की आशंका है। छितौनी तटबंध से सटे गंडक नदी में खैर की लकड़ी छुपाकर रखी गई थी। रेंजर प्रकाश पांडेय और डिप्टी रेंजर अमित तिवारी ने वन कर्मचारियों के साथ इस जगह पर छापेमारी की तो पानी में रखा 35 बोटा खैर की लकड़ी बरामद की गई।
लकड़ी लावारिस हालत में नदी से बरामद
इससे पहले पिछले शनिवार को भी वन विभाग की टीम को 30 बोटा खैरे की लकड़ी मिली थी। हालांकि इस लकड़ी को किसने काटा और लाकर रखा, यह पता नहीं चल पाया है। वन विभाग ने लावारिस हाल में लकड़ी जब्त करते हुए खडडा वन कार्यालय लाकर वैधानिक कार्रवाई करने में जुटी हुई है। डिप्टी रेंजर अमित तिवारी ने बताया कि अलग अलग कारवाई में 65 बोटा खैरे की लकड़ी लावारिस हालत में नदी से बरामद की गई है। अनुमान है कि लकड़ी को सोहगीबरवा या वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से काटकर लाया गया होगा। इस लकड़ी का पहले पूजा पाठ में प्रयोग होता था। लोग इसके गुण के बारे में अनजान थे, पूजा पाठ और घरों के चौखट, खम्भा लगाने के अलावा इसका कोई इस्तेमाल नहीं था, लेकिन दशक बाद धिरे धिरे इस लकड़ी का डिमांड बढ़ गया जिसके बाद तस्कर इसे चोरी छिपे काटने और तस्करी करने लगे।