Bihar Police : सिपाहियों की लगी लॉटरी; 2685 सिपाही को ASI बनाया, 3400 एएसआई बनेंगे सब-इंस्पेक्टर
Bihar News : बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने सिपाहियों के लिए बुधवार को जैसे लॉटरी निकाल दी। एकमुश्त 2685 सिपाहियों को सहायक अवर निरीक्षक, यानी असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के रूप में प्रोन्नत किया है। इसके अलावा 3400 एएसआई को सब-इंस्पेक्टर बनाया जा रहा है।
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नीतीश कुमार की सरकार ने सिपाहियों एकमुश्त 2685 सिपाहियों को सहायक अवर निरीक्षक, यानी असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के रूप में प्रोन्नत किया है। बिहार पुलिस मुख्यालय के कार्मिक कल्याण विभाग की ओर से 6 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार गृह विभाग की आरक्षी शाखा का अनुमोदन लेकर उच्चतर पद का कार्यकारी प्रभार दिया गया है। इस आदेश में बताया गया है कि बिहार पुलिस के सहायक अवर निरीक्षक के रिक्त पदों पर वरीयता और योग्यता के आधार पर सिपाहियों को उनके वर्तमान पदस्थापना वाले जिले और यूनिट में एएसआई के रूप में कार्यकारी प्रभार दिया जा रहा है। सबसे ज्यादा 996 सिपाहियों को पटना में एएसआई का प्रभार मिला है। इसके बाद गया में 150, सारण में 118, समस्तीपुर में 101, बेतिया पुलिस जिला में 77, रोहतास में 70, भोजपुर में 66, दरभंगा में 62, सीतामढ़ी में 60 और नालंदा में 57 सिपाहियों को एएसआई का कार्यकारी प्रभार दिया गया है। इसके साथ ही अब यह भी तय हो गया है कि 3400 एएसआई को सब-इंस्पेक्टर बनाया जाएगा। सरकार इसके अलावा इंस्पेक्टर को भी डीएसपी का प्रभार देने के लिए सूची बना रही है।
वर्दी बदल जाएगी लेकिन इन बातों का रखना होगा ध्यान
इस आदेश की खास बात यह भी है कि कार्यकारी प्रभार मिलने के बावजूद फिलहाल इन सभी कर्मियों के वेतनमान में बदलाव नहीं किया गया है। इन सभी कर्मियों को अपने ही वेतनमान में कार्यकारी प्रभार के अंतर्गत नए पद पर उत्तरदायित्व को निभाना होगा। उनकी वर्दी बदल जाएगी। यह सिपाही की जगह एएसआई की वर्दी में होंगे। जिन सिपाहियों को एएसआई का कार्यकारी प्रभार मिला है, उन्हें इस पद के लिए तय प्रशासनिक, अनुशासनिक एवं विधिक प्राधिकार भी मिल जाएंगे। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है की कार्यकारी प्रभाव के अंतर्गत काम किए जाने से प्रमोशन का दावा न तो वर्तमान में हो सकेगा और न ही भविष्य में। इस पंक्ति का मतलब है की ऐसे एएसआई किसी भी प्रकार के उच्चतर पद के वेतन का दावा नहीं कर सकेंगे। एएसआई के रूप में नए पद पर प्रभार लेने से पहले इन्हें इस आशय का न्यायिक शपथ पत्र देना होगा कि उनके विरुद्ध किसी प्रकार का विभागीय कार्यवाही संचालित या लंबित नहीं है और ना ही कोई दंडादेश प्रभावी है। शपथ पत्र में यह भी स्पष्ट करना होगा कि उनके विरुद्ध निगरानी, अपराधिक, फौजदारी या कोई अन्य न्यायिक विवाद लंबित नहीं है। इस शपथ पत्र के बाद ही कार्यालय के प्रधान इन्हें कार्यभार दे सकेंगे।