बिहार में हाहाकार: भाजपा ने '4जी' को ठहराया जिम्मेदार, जदयू को है बारिश का इंतजार
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बिहार में 128 बच्चे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण असमय काल के गाल में समा चुके हैं। इसे दिमागी बुखार और जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। कई बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं जो इस समय जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। पर्याप्त इलाज और सुविधा न होने के कारण रोजाना कुछ बच्चों की सांसें थम रही हैं। लेकिन बिहार के सांसद-मंत्री इस मुद्दे को लेकर कितने गंभीर हैं इसके कुछ उदाहरण रोज सामने आ रहे हैं। कोई मंत्री प्रेस वार्ता के बीच क्रिकेट का स्कोर जानना चाहते हैं तो कोई सोने में मशगूल दिखे। एक सांसद ने इसके लिए 4जी को जिम्मेदार ठहराया तो एक को बारिश का इंतजार है।
बुखार के लिए 4जी है जिम्मेदार
मुजफ्फरपुर से भाजपा सांसद अजय निषाद ने बेतुका बयान देते हुए बुखार के लिए 4जी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, 'यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है। आज नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर गए जिसके लिए उन्हें आभार। इस मामले में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है कि आने वाले समय में बीमारी पर कैसे काबू पाया जाए। बीमारी की हालत में जो बच्चे अस्पताल आते हैं उनकी और मरने वाले बच्चों की संख्या कैसे कम की जाए।'
उन्होंने आगे कहा, 'अभी तक इस बीमारी का पता नहीं चला है। हर कोई अपनी राय दे रहा है। मेरा मानना है कि हमें 4जी पर काम करने की जरूरत है। पहले जी से गांव, दूसरे जी से गर्मी, तीसरे जी से गरीबी और चौथे जी से गंदगी। कहीं न कहीं बीमारी का इससे वास्ता है। इलाज के लिए जो मरीज आते हैं वह गरीब तबके या ज्यादार अनुसूचित जाति के होते हैं। उनकी जीवनशैली निम्न स्तर की है। उसे ऊपर उठाए जाने की जरूरत है।'
जदयू को है बारिश का इंतजार
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सांसद दिनेश चंद्र यादव ने कहा, 'मुजफ्फरपुर की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इतने सालों से जब भी गर्मी का मौसम आता है बच्चे बीमार पड़ते हैं और मौत की संख्या बड़ी हो जाती है। ऐसा होता है। सरकार भी तैयारी करती है। जैसे ही बारिश होगी यह रुक जाएगा।
मंत्री के प्रेस वार्ता के बीच क्रिकेट का स्कोर पूछने का सासंद ने किया बचाव
एईएस से पैदा हुए हालात का जायजा लेने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को मुजफ्फरपुर का दौरा किया था। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे भी थे। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने मंत्रियों को बताया कि हालात का जायजा लेने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक स्थिति की समीक्षा बैठक की। इस दौरान बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे की दिलचस्पी क्रिकेट का ताजा स्कोर जानने में थी। एनएनआई ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें वो इस अहम बैठक के दौरान क्रिकेट का स्कोर पूछते देखे जा सकते हैं।
मंत्री के इस व्यवहार की जहां हर कोई आलोचना कर रहा है वहीं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सांसद दिनेश चंद्र यादव ने उनका बचाव किया है। सांसद ने कहा, 'भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान लोगों के दिलों में राष्ट्रवाद की भावना होती है। वह चाहते हैं कि भारत जीते। उन्होंने बैठक में सबकुछ गंभीरता से किया और बीच में स्कोर पूछा। विपक्ष के आरोप बिलकुल सही नहीं हैं।'
प्रेस वार्ता के दौरान सोते नजर आए अश्विनी कुमार चौबे
दिमागी बुखार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर हो रही प्रेस वार्ता के दौरान रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे सोते हुए नजर आए। इस पर जदयू ने ट्वीट करते हुए लिथा था, '200 बच्चों की जान जाने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की प्रेस वार्ता हो रही है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे सो रहे हैं। जाने इनकी मानवीय संवेदना कहां मर गईं?' हालांकि अपना बचाव करते हुए मंत्री का कहना है कि मैं मनन- चिंतन भी करता हूं, सो नहीं रहा था।
राज्य सरकार को देंगे हर संभव मदद
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने बिहार में एईएस के बढ़ते प्रकोप पर कहा, 'हमने राज्य सरकार को सहर संभव सहायता देने का वादा किया है। हर हर घंटे परिस्थिति की निगरानी कर रहे हैं।' इससे पहले सोमवार को उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया था। संसद भवन में शपथ लेने के बाद जब उनसे बिहार मामले पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'नहीं-नहीं कोई बाइट नहीं दूंगा आज।
अस्पताल देरी से आ रहे हैं मरीज
बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा, 'मुख्यमंत्री ने कुछ निर्देश दिए हैं। मौत का मुख्य कारण यह है कि मरीज अस्पताल काफी देरी से आ रहे हैं। मरीजों को अस्पतालों आने के लिए कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। सरकार उनके खर्च की प्रतिपूर्ति कर देगी। हर परिवार को अस्पताल आने पर 400 रुपये दिए जा रहे हैं। लोगों में जागरूकता पैदा की जा रही है ताकि बच्चे भूखे पेट न सोएं और बीमार पड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल लाया जाए। हमने निर्देश दिए हैं कि सभी आशा कार्यकर्ता, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सभी घरों में ओआरएस का घोल बांटे और उन्हें इनकी महत्ता बताएं।'