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‘मीडिया ट्रायल’ को लेकर चिंतित हैं चीफ जस्टिस
पटना/एजेंसी
Updated Sat, 23 Feb 2013 07:18 PM IST
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भारत के चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर ‘मीडिया ट्रायल’ के बढ़ते मामलों से चिंतित हैं और उनका मानना है कि इससे आरोपी के खिलाफ पूर्वाग्रह की स्थिति पैदा होती है।
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यहां एक तीन दिवसीय न्यायिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल इस समय सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। इसे नहीं होना चाहिए। किसी भी मामले पर फैसला करने का काम कोर्ट पर छोड़ देना चाहिए।
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दिल्ली गैंगरेप में नाबालिग के शामिल होने के बाद मांग उठने लगी है कि नाबालिग की उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी जाए। इस बारे में कबीर ने कहा, ‘इस पर फैसला सिर्फ संसद ही ले सकती है और अन्य किसी को यह अधिकार नहीं है।’ गवाहों की सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट चीफ जस्टिस ने कहा कि इसमें काफी सुधार होने की गुंजाइश है।
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उन्होंने अपने भाषण में कहा कि देश में गवाह की सुरक्षा जैसा कोई विकल्प ही उपलब्ध नहीं है। अदालतों में गवाहों के लिए बैठने की व्यवस्था तक उचित ढंग से नहीं है। हम उन्हें न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। पटना हाई कोर्ट बिहार न्यायिक अकादमी और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन शुक्रवार को किया गया।
अल्तमस कबीर ने अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि इस समाधान न्यायालयों को मजबूत कर के ही हो सकता है। हम प्रशासन से अधीनस्थ कोर्ट को मजबूत करने का निवेदन कर सकते हैं ताकि जजों की संख्या को बढ़ाया जा सके।
कबीर ने कहा कि केस को निपटाने की समय सीमा वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती है। कई मामलों में सजा न मिल पाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि गवाहों को बंधक बना लिया जाता है। पर्याप्त सुबूतों के अभाव और गवाहों के पेश नहीं होने के चलते कई केस में सजा नहीं हो पाती है।