Chhath Puja : लाखों श्रद्धालुओं ने दिया अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य, घाट पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
छठ का पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि को दिया गया। यह अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाता है। इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है।
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लोक आस्था के महापर्व छठ का आज तीसरे पटना समेत पूरे बिहार में लाखों श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। श्रद्धालुओं ने जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया। पंडितों के अनुसार, रविवार शाम 05:22 बजे तक भगवान भास्कर को अर्घ्य देने का समय है।
इधर, पटना समेत पूरे बिहार में छठ घाट पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। छठी मैय्या के जयकारे से पूरा घाट गूंज रहा था। छठ घाट पर जिला प्रशासन की ओर से सारी तैयारी पहले ही पूरी कर ली गई है। पटना में भी छठ के लिए 100 से अधिक घाट तैयार किए गए हैं। इनमें कलेक्ट्रेट घाट, महेंद्रु घाट, दीघा घाट, गाय घाट पर काफी भीड़ उमड़ी।
पटना एसएसपी राजीव मिश्रा ने कहा कि पटना में छठ घाट पर सुरक्षा की सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। सभी जगह पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर ली गई है। कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं। सभी घाटों पर वॉच टावर भी लगाए गए हैं। सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जा रही है। लोगों से अपील है कि किसी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। किसी भी समस्या के लिए पुलिस से संपर्क करें।
सूर्य की पूजा मुख्य रूप से तीन समय विशेष लाभकारी होती है - प्रातः , मध्यान्ह और सायंकाल। प्रातःकाल सूर्य की आराधना स्वास्थ्य को बेहतर करती है। मध्यान्ह की आराधना नाम-यश देती है। सायंकाल की आराधना सम्पन्नता प्रदान करती है। अस्ताचलगामी सूर्य अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं, जिनको अर्घ्य देना तुरंत प्रभावशाली होता है। जो लोग अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें प्रातःकाल की उपासना भी जरूर करनी चाहिए।
ज्योतिष-कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित अरुण कुमार मिश्रा के अनुसार, यह लोक आस्था का महापर्व है। मतलब, यह बिहार और पूर्वांचल के लोगों की आस्था का प्रतीक है। आस्था पर न तो सवाल किया जा सकता है और न ही इसका कोई जवाब हो सकता है। जहां तक महत्व का सवाल है तो यह प्रकृति को चलाने वाले सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। यह देवी कात्यायनी से आशीर्वाद मांगने का पर्व है। छठ दिखाता है कि जिसका अंत है, उसका उदय भी होगा।
छठ क्यों मनाते हैं?
वास्तविक रूप से इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे सकता। यह बिहार के सनातन हिंदू धर्मावलंबियों के घर-घर में होने वाला पर्व है। जो अपने घर में नहीं करते, वह दूसरों के घर में जाकर करते हैं। जो दूसरों के घर पर नहीं जाते, वह घाट पर जाकर अर्घ्य देते हैं। कोई मनोकामना के साथ करता है, कोई पूरा होने पर करता है तो बहुत सारे लोग यूं ही करते हैं आस्था के कारण। मनोकामना छठी मइया पूरी करती हैं और आस्था सूर्यदेव के प्रति दिखाते हैं।

छठ व्रतियों के लिए सड़के धोते लोग
पटना में सभी सड़कों को धो दिया गया गया। गंगा घाट तक जाने वाली सभी सड़कों को आज धोया जाता है। छठ समिति के लोग सड़कों की साफ-सफाई की जिम्मेवारी लेते हैं। जिस राह से छठ व्रती गुजरती हैं, उस राह को पानी से धोया जाता है।