Bihar Caste Census : हाईकोर्ट ने डाटा सुरक्षा को लेकर की थी ताकीद; मगर दो महीने से यह कहां रखे हैं, जानिए
Patna High Court Hearing Today : हाईकोर्ट ने 04 मई को बिहार में जातिगत जन-गणना पर अंतरिम रोक लगाते समय सबसे ज्यादा ताकीद इस बात को लेकर की थी कि जो डाटा जुटाए गए हैं, वह सुरक्षित रहें। आज फिर से सुनवाई हो रही तो जानिए कहां है वह डाटा।
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पटना हाईकोर्ट ने 04 मई को बिहार में जाति आधारित जन-गणना पर रोक लगाते समय स्पष्ट निर्देश दिया था कि अंतिम फैसला आने तक एकत्रित डाटा को सुरक्षित रखा जाए और किसी से शेयर नहीं किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जुटाया गया डाटा निजी और संवेदनशील है। तो, क्या सरकार ने इसकी सुरक्षा को लेकर कुछ अलग तरह के इंतजाम किए थे? यह सवाल पिछले दो महीने से फिज़ा में है। सोमवार को जब कोर्ट में सुनवाई हो रही है तो यह सवाल और ज्यादा प्रासंगिक है। 'अमर उजाला’ की टीम ने इन दो महीनों में कई प्रगणकों और सरकारी जाति आधारित सर्वे के मास्टर ट्रेनरों से संपर्क किया, मुलाकातें की तो सुरक्षा की वास्तविकता सामने आई।
आदेश का असर और ऑनलाइन डाटा की स्थिति
पटना हाईकोर्ट ने 04 मई को अंतरिम आदेश दिया और कुछ ही घंटे में सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर तमाम जिलाधिकारियों के जरिए गणना में लगे सारे कर्मियों तक एक लाइन का मैसेज पहुंच गया कि डाटा को यथास्थिति सुरक्षित किया जाए। इसके बाद क्या हुआ? दरअसल, भले ही सरकार ने 80 प्रतिशत काम पूरा होने की बात की है लेकिन सच्चाई यही है कि यह आंकड़ा कागज पर जानकारी जुटाने वालों का है। मतलब, 80 फीसदी के करीब लोगों की जानकारी पेपर पर ली गई है। जमा की गई जानकारी (डाटा) का औसतन 25 फीसदी भी अभी ऑनलाइन अपलोड नहीं हुआ है। जिस सरकारी सर्वर की बात सरकार ने की है, उसकी जगह ज्यादातर डाटा अभी पेपर पर ही है।
ऑफलाइन डाटा अब भी घरों में ही 'सुरक्षित' है
फील्ड से सारी जानकारी कागजों पर ली गई थी। उसे लगातार ऑनलाइन अपलोड किया जाना था, लेकिन कहीं सर्वर तो कहीं लॉगिन इश्यू और कई जगह प्रगणकों पर अत्यधिक दबाव के कारण यह नहीं हुआ। मई के दूसरे हफ्ते में ऑनलाइन अपलोड के काम पर ध्यान दिया जाना था, लेकिन इसी बीच 04 मई को पूरी प्रक्रिया तो तत्काल प्रभाव से रोकने का हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश दे दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यथास्थिति में ऑफलाइन डाटा रखा गया। ऑफलाइन डाटा चूंकि प्रगणक अपने घरों में रखते थे, इसलिए वह घरों में ही रह गए। सरकारी तंत्र ने इनकी सुरक्षा के लिए कार्यालयों में ऐसी व्यवस्था नहीं की।