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कार्डिकॉन 2026: डॉ. संदीप कुमार बने CSI बिहार चैप्टर के नए अध्यक्ष, 14 सत्रों में क्या-क्या हुआ? जानिए

Tue, 03 Nov 2026 08:15 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Tue, 03 Nov 2026 08:15 AM IST
सार

Cardicon 2026: पटना में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के बिहार चैप्टर का 32वां वार्षिक अधिवेशन संपन्न हो गया। सम्मेलन के अंतिम दिन करीब 14 वैज्ञानिक सत्रों में गर्भावस्था में हृदय रोग, पेसमेकर की नई तकनीक, हार्ट फेल्योर और जटिल ब्लॉकेज के इलाज पर चर्चा हुई। आइये जानते हैं सत्र के दौरान क्या-क्या हुआ?

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Cardiologists Discuss Advanced Heart Treatments and New Technologies at CARDICON 2026
कॉर्डिकॉन 2026। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पटना में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (CSI) के बिहार चैप्टर का 32वां वार्षिक अधिवेशन कार्डिकॉन 2026 रविवार को संपन्न हो गया। दो दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन करीब 14 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इनमें देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हृदय रोग विशेषज्ञों ने हृदय रोगों की आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, नई तकनीकों, उपचार की चुनौतियों और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। सम्मेलन के दौरान इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार को CSI बिहार चैप्टर का नया अध्यक्ष चुना गया। निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने उन्हें औपचारिक रूप से कार्यभार सौंपा।

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गर्भावस्था के बाद भी हो सकती है दिल से जुड़ी गंभीर परेशानी
सम्मेलन के आयोजन सचिव और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक सत्रों में गर्भावस्था के दौरान होने वाली हृदय संबंधी जटिलताओं पर विशेष चर्चा हुई। दिल्ली के डॉ. सुभेंदु मोहंती ने बताया कि कई बार गर्भवती महिलाओं को पहले से कोई हृदय रोग नहीं होता, लेकिन प्रसव के बाद उनमें हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं विकसित हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए बीमारी की समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय प्रबंधन बेहद जरूरी है।
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विशेषज्ञों ने उच्च रक्तचाप को भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या बताते हुए इसके कारणों, जांच और नियंत्रण पर जानकारी दी। CSI बिहार चैप्टर के सचिव डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि कई बार किडनी और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के कारण भी हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है। समय पर जांच और उचित इलाज से इससे होने वाली गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
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पेसमेकर की नई तकनीक और जटिल ब्लॉकेज के इलाज पर चर्चा
देश के प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरडी यादव ने पेसमेकर की नई तकनीक, विशेषकर कंडक्शन सिस्टम पेसिंग (Conduction System Pacing) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इसके फायदे और जरूरी सावधानियों से चिकित्सकों को अवगत कराया। डॉ. यादव ने लीडलेस पेसमेकर को सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से मरीजों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं।

कोलकाता के डॉ. दिलीप कुमार और डॉ. संजीव मुखर्जी ने हृदय की अनियमित धड़कन यानी एरिदमिया के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। वहीं, मेदांता अस्पताल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रमोद कुमार ने हृदय की धमनियों में जटिल ब्लॉकेज के इलाज की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंभीर और जटिल ब्लॉकेज को दूर करने के लिए रोटाब्लेशन और आईवीयूएस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनकी मदद से जटिल मामलों में भी मरीजों का अधिक प्रभावी ढंग से उपचार किया जा सकता है।

कार्डियक सर्जरी और कार्डियोलॉजी के बीच बेहतर तालमेल जरूरी
सम्मेलन में प्रेसिडेंशियल ऑरेशन देते हुए एम्स पटना में कार्डियो थोरेसिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों विभागों को अलग-अलग काम करने के बजाय एक टीम के रूप में काम करना चाहिए। इससे जटिल हृदय रोगों के इलाज में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से जटिल कोरोनरी आर्टरी डिजीज और वाल्व संबंधी बीमारियों के उपचार में हाइब्रिड प्रोसीजर की उपयोगिता बताई। डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि इसके लिए ऐसे हाइब्रिड ऑपरेशन थिएटर की जरूरत है, जहां कैथेटर आधारित इंटरवेंशन और मिनिमली इनवेसिव हार्ट सर्जरी की सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हों। आने वाले समय में हाइब्रिड ओटी की भूमिका और महत्वपूर्ण होने वाली है।

मोटापा और डायबिटीज से बढ़ता है हृदय रोगों का खतरा
मेदांता अस्पताल के डॉ. शमशाद आलम ने हार्ट फेल्योर के आधुनिक उपचार और बेहतर प्रबंधन पर जानकारी दी। वहीं, डॉ. अजय कुमार ने मोटापा और डायबिटीज को हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। कुछ आधुनिक दवाएं ऐसी हैं, जो ब्लड शुगर नियंत्रित करने के साथ हृदय रोगों के खतरे को कम करने में भी मददगार हैं। ऐसे मरीजों को समय पर हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. ओम कुमार ने किडनी और हृदय रोगों के बीच संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने से हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

राइट वेंट्रिकल की जांच को बताया जरूरी
एम्स पटना के हृदय रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनुपम बम्बानी ने हृदय के दाहिने हिस्से यानी राइट वेंट्रिकल की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान कई बार राइट वेंट्रिकल की कार्यक्षमता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता, जबकि इसकी कमजोरी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है। इसलिए इकोकार्डियोग्राफी के जरिए इसकी कार्यक्षमता का नियमित आकलन जरूरी है। इस विषय पर डॉ. श्रद्धा रंजन और डॉ. रंजन कुमार ने भी अपने विचार रखे।

वहीं, वेल्लोर से आए डॉ. जेशू कृपा शुक्ला ने इमरजेंसी में सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की जांच में इकोकार्डियोग्राफी की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि इस जांच से कोरोनरी आर्टरी डिजीज के अलावा सीने में दर्द के दूसरे संभावित कारणों का भी पता लगाया जा सकता है। इससे मरीज को सही समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।


डॉ. संदीप कुमार को मिली बिहार चैप्टर की कमान
सम्मेलन के अंतिम चरण में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, बिहार चैप्टर की वार्षिक आमसभा (GBM) आयोजित की गई। इसमें इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार को बिहार चैप्टर का नया अध्यक्ष चुना गया। सम्मेलन के साइंटिफिक सेक्रेटरी और जीवक हार्ट अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने इसकी जानकारी दी। आयोजन अध्यक्ष डॉ. बीबी भारती ने सम्मेलन की सफलता पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि कार्डिकॉन में देशभर के विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की। वैज्ञानिक चर्चाओं के माध्यम से चिकित्सकों को नई तकनीकों और आधुनिक उपचार पद्धतियों की महत्वपूर्ण जानकारी मिली। निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने औपचारिक रूप से डॉ. संदीप कुमार को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी और उन्हें बधाई दी। इस मौके पर डॉ. एसएस चटर्जी, डॉ. यूसी शामल, डॉ. बीपी सिंह, डॉ. केके वरुण, डॉ. अभिनव भगत, डॉ. अनूप, डॉ. यूएन सिंह, डॉ. अशोक कुमार और डॉ. अजय सिन्हा सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष को शुभकामनाएं दीं। चिकित्सकों ने कहा कि नई कार्यकारिणी बिहार में हृदय रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बचाव संबंधी कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी। 

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