नीतीश की सरकार में क्या होगा लालू का रुतबा?
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शानदार जीत के बाद महागठबंधन के अंदर सरकार में हिस्सेदारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि छठ के बाद नई सरकार का गठन होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस संदर्भ में जल्द ही सहयोगियों से चर्चा करेंगे। नई सरकार में उप-मुख्यमंत्री को लेकर अभी ऊहापोह है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि नीतीश कैबिनेट में राजद का रुतबा संभवत: भाजपा जैसा ही होगा।
राजद से कौन-कौन मंत्री होंगे, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। अब्दुलबारी सिद्दीकी, भोला यादव, रामानंद यादव को मंत्री पद मिलना तय माना जा रहा है, जबकि सुरेंद्र यादव, विजय प्रकाश और समीर महासेठ के लिए बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।
लालू परिवार के एक सदस्य को कैबिनेट में लेने की बात हो रही है, लेकिन इस बात को लेकर मंथन जारी है कि वो लालू की बेटी होगी या फिर उनका बड़ा बेटा होगा।
तेज प्रताप ने जहां सोमवार को कहा कि वह कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि अभी उनकेे दोनों बेटों को विधायी कामकाज सीखना है। उपमुख्यमंत्री के सवाल पर तेजस्वी बोले कि यह पार्टी को तय करना है।
लालू के परिवार को मिलेगी जिम्मेदारी
वैसे नीतीश कैैबिनेट में दूसरे नंबर का दर्जा राजद को शायद ही मिले, लेकिन इतना जरूर कहा जा रहा है कि नीतीश पिछले कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री का विभाग राजद के कद्दावर नेता और मुस्लिम चेहरा रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी को दे सकते हैं। यह भी लगभग तय है कि नीतीश कैबिनेट में जदयू के बराबर जगह राजद को मिलने वाली है।
सूत्रों की मानें तो लालू प्रसाद कैबिनेट गठन या सरकार के कामकाज में दखलअंदाजी से परहेज करेंगे। दोनों के बीच जिस प्रकार का समन्वय बिहार चुनाव में दिखा, वैसा ही आगे देश के स्तर पर भी दिखाने की कोशिश होगी। लालू अगले चार साल में राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को गोलबंद करेंगे, वहीं नीतीश विकास के अपने बिहार मॉडल को मजबूत करेंगे।
विकास के मोर्चे पर गुजरात मॉडल के विकल्प के रूप में 2019 में बिहार मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर मोदी के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करेगी। इसके पीछे एक और कारण यह माना जा रहा है कि अगर आनेवाले दिनों में राजद और जदयू का विलय होता है तो लालू संगठन देखेंगे और नीतीश सरकार चलाएंगे।