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Bihar Politics: अमित शाह ने याद दिलाया बिहार का ऐतिहासिक गौरव, नीतीश कुमार बोले- कैसे बदल सकते हैं इतिहास?

Tue, 14 Jun 2022 03:57 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Amit Mandal Updated Tue, 14 Jun 2022 03:57 PM IST
सार

कहा जाता है कि बख्तियारपुर का नाम 12 वीं शताब्दी के अफगान जनरल बख्तियार खिलजी के नाम पर रखा गया था, जिसने बिहार और बंगाल को लूटा था। 

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BJP stance on history, articulated by Shah, gets thumbs down from Nitish
नीतीश कुमार - फोटो : ANI

विस्तार

इतिहास में हिंदू राजाओं पर अधिक जोर दिया जाने और मुस्लिम आक्रमणकारियों का विरोध किए जाने के भाजपा के नजरिए को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का समर्थन नहीं मिला है, जिनकी जद (यू) भाजपा का सबसे बड़ा गठबंधन सहयोगी है। नीतीश कुमार से उस बहस के बारे में पूछा गया जो एक चिकित्सा पेशेवर द्वारा लिखित इतिहास पर एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान से शुरू हुई है।

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नीतीश बोले, कैसे बदल सकते हैं इतिहास 
आप इतिहास कैसे बदल सकते हैं? क्या ऐसा करना संभव है, सोमवार को यहां उनके साप्ताहिक जनसंपर्क कार्यक्रम के इतर पूछे गए सवाल के जवाब में नीतीश कुमार ने हंसी के साथ चुटकी ली। उन्होने अपने ठंडे जवाब के साथ इस मुद्दे को खारिज कर दिया और उनका संदेश तेज और स्पष्ट था।  
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पिछले साल एक भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल, जिन्हें हिंदुत्व कट्टरपंथी के रूप में देखा जाता है, उन्होंने सुझाव दिया था कि राज्य की राजधानी के बाहरी इलाके के नीतीश कुमार से जन्म वाले शहर बख्तियारपुर का नाम बदलकर जद यू नेता के नाम पर रखा जाए। कुमार ने इसे फालतू बात करार देते हुए सरसरी तौर पर खारिज कर दिया था।
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बख्तियार खिलजी ने बिहार और बंगाल को लूटा था
कहा जाता है कि बख्तियारपुर का नाम 12 वीं शताब्दी के अफगान जनरल बख्तियार खिलजी के नाम पर रखा गया था, जिसने बिहार और बंगाल को लूटा था और जिसके कुख्यात कारनामों में नालंदा में उच्च शिक्षा के केंद्र को तोड़ना  भी शामिल है, जहां दूर-दूर से बौद्ध अपनी पढ़ाई के लिए आते थे। जब पार्टी के संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सम्राट अशोक की कथित बदनामी के खिलाफ एक निरंतर अभियान चलाया, तो जद (यू) इसे अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया। 


अशोक मगध के महान राजा चंद्रगुप्त मौर्य के पोते थे जो चरवाहों के एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे और उन्होंने मौर्य वंश की स्थापना की थी, जिसे भाजपा राष्ट्रवादी गौरव के साथ याद दिलाना चाहती है। हालांकि, चंद्रगुप्त मौर्य की उत्पत्ति के कारण राजा और उनके वंशजों को राज्य में राजनीति पर हावी होने वाले ओबीसी वर्ग के लिए सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा है।

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