बिहार में दबे पांव विकराल रूप ले रहा कोरोना, एक नहीं कई हैं वजह, दिल्ली से भी ज्यादा टेस्ट करने की जरूरत
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बिहार में कोरोना वायरस दबे पांव अपनी पैठ बनाने लग रहा है। राज्य में अब तक 20 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन को इस वजह से फिर लॉकडाउन लगाना पड़ा है। बीते 24 घंटे की बात करें तो 1320 नए मामले सामने आए हैं। परेशानी यह है कि पटना हाईकोर्ट, राज्य सचिवालय से लेकर गांव देहात तक से संक्रमितों के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों को आशंका है कि कोरोना वायरस बिहार में विकराल रूप ले सकता है और इससे निपटने के लिए प्रशासन को कई कदम तुरंत उठाने होंगे। जिस ढंग से केरल और दिल्ली में टेस्ट किए गए, उसी की तर्ज पर बिहार को भी टेस्टिंग को बढ़ाना होगा।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत
- स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो बिहार निचले पायदान वाले राज्यों में ही खड़ा दिखता है।
- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 32.1 फीसदी लोग ही ऐसे थे, जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ा।
- इसके बाद झारखंड और यूपी जैसे राज्य हैं।
- प्रति एक लाख लोगों पर टेस्टिंग की रिपोर्ट दिखाती है कि 22 राज्यों में बिहार सबसे पीछे है।
- इस वजह से बहुत से मरीज तो बिना टेस्टिंग और इलाज के ही दम तोड़ दे रहे हैं।
टेस्टिंग में पिछड़ता बिहार
- हालांकि बिहार अकेला ऐसा राज्य नहीं है, जहां कम टेस्टिंग हो रही हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी टेस्टिंग कम हो रही है।
- टेस्टिंग और अस्पताल में इलाज में मामले में दिल्ली में स्थिति सबसे बेहतर है, जहां ज्यादा से ज्यादा संख्या में टेस्टिंग हो रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं की पहले से कमी
- बिहार में पहले ही चिकित्सकों की कमी है। कोरोना वायरस के दौरान बहुत से डॉक्टरों के ड्यूटी पर नहीं आने की भी खबरें आ रही हैं।
- एनएसएस सर्वे 2017-18 के मुताबिक बिहार में गरीब परिवार बीमार होने की जानकारी भी नहीं दे पाते।
- बिहार में बीमारी के बारे में रिपोर्ट कराने की औसत 15 दिन के करीब थी।