Bihar : शरद विवेक सागर को मिली डॉक्टरेट की उपाधि, मिल चुका है 21वीं सदी के विवेकानंद का सम्मान
Sharad Vivek Yadav : भारतीय युवा आइकॉन शरद विवेक सागर को राजस्थान के जयपुर में जे.ई.सी.आर.सी विश्वविद्यालय ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। अंग्रेजी एवं हिंदी के फायरब्रांड वक्ता के रूप में जाना जाता है।
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बिहार के प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी और भारतीय युवा आइकॉन शरद विवेक सागर को शनिवार, 6 जनवरी को राजस्थान के जयपुर में जे.ई.सी.आर.सी विश्वविद्यालय ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। जयपुर में आयोजित जे.ई.सी.आर.सी विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह में अध्यक्ष ओ.पी. अग्रवाल ने शरद विवेक को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। विश्वविद्यालय ने प्रतिष्ठित अतिथियों, शिक्षाविदों, स्नातक छात्रों और अभिभावकों की उपस्थिति में घोषणा की, कि "आज, हम एक अतिविशिष्ट क्षण के पड़ाव पर हैं, जब हम गर्व से उस महान व्यक्ति को अपना सर्वोच्च सम्मान प्रदान कर रहे हैं जिनकी जीवन यात्रा कर्मठता, दूरदर्शिता और परिवर्तनकारी नेतृत्व का प्रतीक है। बड़े सौभाग्य और गौरव के साथ आज जे.ई.सी.आर.सी विश्वविद्यालय, जयपुर शरद विवेक सागर को डॉक्टर ऑफ लेटर्स 'ऑनरिस कॉसा' की मानद उपाधि प्रदान करता है।
डॉ. माशेलकर ने की सागर की प्रशंसा
विश्वविद्यालय ने इस सर्वोच्च सम्मान के लिए दो व्यक्तियों का चुनाव किया। विवेक सागर के साथ प्रसिद्ध वैज्ञानिक और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. रघुनाथ अनंत माशेलकर को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। डॉ. माशेलकर ने अपने दीक्षांत वक्तव्य में सागर की प्रशंसा करते हुए कहा, कि “यह मेरी 48वीं मानद डॉक्टरेट उपाधि है पर मैंने शरद सागर से अधिक प्रेरणादायी भाषण कभी नहीं सुना।” शनिवार की शाम को डॉ. माशेलकर ने पुनः सोशल मीडिया पर मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के संबंध में पोस्ट करते हुए कहा कि “50 वर्ष छोटे शरद सागर के साथ आज मंच साझा करना एक सौभाग्य की बात रही। जे.ई.सी.आर.सी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में वैचारिक नेतृत्व से भरा सागर का तेजतर्रार वक्तृत्व अत्यंत प्रेरणादायक था - और ऐसा उद्बोधन मैंने बहुत लंबे समय में नहीं सुना था।'' शरद सागर को दी गई मानद उपाधि के उद्धरण में लिखा है, “बिहार के ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले, श्री सागर एक विश्व-विख्यात हस्ती, प्रतिष्ठित सामाजिक उद्यमी और हमारे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा के प्रतीक के रूप में उभरे हैं। अटलता, नवीनता और युवाओं को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता से चिह्नित उनका काम जे.ई.सी.आर.सी विश्वविद्यालय के मूल्यों के साथ सहजता से मेल खाता है। डॉक्टर ऑफ लेटर्स की यह मानद उपाधि उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों और समाज के उत्थान के प्रति अटूट समर्पण का प्रमाण बने।”
16 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की
बिहार से आने वाले शरद सागर विश्व प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी, विख्यात विचारक, प्रखर वक्ता और भारतीय युवा आइकॉन हैं। बिहार के छोटे शहरों और गांवों में पले-बढ़े सागर ने 16 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की। संगठन से प्रशिक्षित युवाओं ने दुनिया भर के शीर्ष विश्वविद्यालयों से ₹175 करोड़ से भी अधिक की छात्रवृत्ति प्राप्त की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पटलों पर युवा राजदूतों के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार एवं फ़ेलोशिप जीती हैं, अनेकानेक प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त की है और कई सामाजिक परियोजनाओं का सृजन किया है। 2021 में सागर हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन में छात्र संघ अध्यक्ष चुने जाने वाले पहले भारतीय बने। 2022 में दैनिक जागरण की संपादकीय टीम ने लाखों युवा भारतीयों के लिए शिक्षा और नेतृत्व को फिर से परिभाषित करने के लिए सागर को भारत के युवा आइकन का पुरस्कार दिया। 2023 में फेमिना ने भारत के दिग्गज अभिनेताओं, एथलीटों, प्रभावशाली लोगों और बिजनेस लीडर्स जैसे मुकेश अंबानी, विराट कोहली, नीरज चोपड़ा, आनंद महिंद्रा और शाहरुख खान के साथ शरद सागर को भारत के 60 मोस्ट ऐडमायर्ड मेन (मेन वी लव) में सूचीबद्ध किया।
यह व्यक्ति का नहीं एक विचार का सम्मान है
मानद उपाधि प्राप्त करते हुए शरद सागर ने कहा कि डॉ. माशेलकर के साथ यह सम्मान पाकर मैं अभिभूत हूं। उनका और मेरा जन्म आधी सदी के अंतर पर हुआ। मैं उनकी विशाल छाया में खड़ा हूं और यह सम्मान प्राप्त कर रहा हूं। मैं हृदय की गहराई से मानता हूँ कि यह एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है। यह एक विचार का सम्मान है - जिसे लेकर मैंने 16 वर्ष की आयु में डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की - यह विचार कि प्रतिभा समान रूप से वितरित है लेकिन अवसर नहीं। हमारे देश में कहीं भी कोई भी बच्चा, अगर सही उम्र और मंच पर शैक्षिक अवसर और प्रशिक्षण पाए तो वह भी गांधी और अंबेडकर, विक्रम साराभाई और वर्गीस कुरियन और हमारे अपने डॉ. माशेलकर की तरह ही हमारे राष्ट्रीय जीवन में योगदान दे सकता है। प्रत्येक बच्चे को अपने शैक्षणिक जीवन को भारत के राष्ट्रीय जीवन के साथ, अपनी शैक्षणिक यात्रा को भारत की राष्ट्रीय यात्रा के साथ जोड़ने का अवसर मिलना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने किया था आमंत्रित
16 वर्ष की आयु में शरद सागर ने राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की। 24 वर्ष की आयु में फोर्ब्स ने उन्हें विश्व के 30 सबसे प्रभावशाली युवाओं की सूची में शामिल किया। 2016 में सागर राष्ट्रीय एवं वैश्विक खबरों में रहे जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें को व्हाइट हाउस की एक विशेष सभा में एकमात्र भारतीय के रूप में आमंत्रित किया। सागर भारत के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में सबसे कम उम्र के और सबसे ज्यादा आमंत्रित विशेषज्ञों में से एक हैं। 2017 में 25 वर्ष की आयु में सागर किसी विश्वविद्यालय के मुख्य अतिथि और दीक्षांत वक्ता के रूप में आमंत्रित होने वाले सबसे युवा भारतीय बने।
21वीं सदी के विवेकानंद की मिली उपाधि
संगठनात्मक नेतृत्व के अतिरिक्त शरद सागर को अंग्रेजी एवं हिंदी के फायरब्रांड वक्ता के रूप में जाना जाता है। एक औसत वर्ष में शरद सागर 20 से अधिक राज्यों में 250 से अधिक प्रमुख सार्वजनिक भाषण देते हैं। उन्हें भारत और दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा शिक्षा, नेतृत्व, उद्यमशीलता और राष्ट्र-निर्माण पर व्याख्यान देने के लिए अक्सर आमंत्रित किया जाता है। वडोदरा के विवेकानन्द मेमोरियल हॉल में एक प्रेरक भाषण के पश्चात एक प्रमुख भारतीय मीडिया हाउस ने सागर को "21वीं सदी के विवेकानंद" की उपाधि दी।