Bihar Politics: क्या होगा बिहार में सत्तारूढ़ दलों का मंत्रिमंडल गणित? सीएम का नाम तय नहीं, कहां-क्या चल रहा?
बिहार में नई सरकार का खाका अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। दिल्ली और पटना में बैठे अलाकमान मंथन कर रहे हैं। मंत्रिमंडल में किसे शामिल किया जाएगा? किसे दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा? कौन सा दल क्या चाह रहा है? आइये सबकुछ जानते हैं...
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बिहार का मुख्यमत्री कौन होगा? यह अब तक तय नहीं हुआ है। 10 अप्रैल को सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेंगे। इसके बाद वह कभी भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। संभावन है कि खरमास के बाद नई सरकार का गठन कर दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कुछ नेताओं ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा चल रही है। दिल्ली में बैठे आलाकामन ने कुछ नामों पर चर्चा कर रही है। अंतिम मुहर अब तक नहीं लग पाई है। इधर, सोशल मीडिया पर नई सरकार के मंत्रिमंडल का गठन भी रोज हो रहा है। ऐसे में क्या है बिहार में सत्तारूढ़ दलों का मंत्रिमंडल गणित आइये जानते हैं...
जदयू के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि नई सरकार बनाने में भी नीतीश कुमार की अहम भूमिका होगी। निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि संगठन जिसे भी मुख्यमंत्री के रूप में चुनेगा, वह हमलोगों को सर्वमान्य होगा। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भाजपा इस बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 89 विधायक भाजपा के पास है। सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद यह तो तय है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा। इसके लिए दिल्ली दरबार में मंथन चल जारी है। इस स्थिति में डिप्टी सीएम का पद जनता दल यूनाईटेड के पास जाएगा। फिलहाल भाजपा कोटे से दो डिप्टी सीएम हैं। जदयू की ओर से भी दो डिप्टी सीएम का दावा किया जा सकता है। नई कुछ ऐसे नए चेहरों को मौका मिला सकता है। हालांकि, मौजूदा सरकार में बड़े चेहरे हैं उन्हें सरकार रिपीट जरूर करेगी। हाल के दिनों में विपक्ष ने जिन मंत्रियों पर सवाल उठाया है, उनपर NDA दोबारा विचार कर रहा है।
जदयू अपने पास गृह और विधानसभा अध्यक्ष का पद चाह रहा
राजनीतिक गलियारे से यह बात सामने आ रहे हैं कि इस बार जदयू अपने पास गृह और विधानसभा अध्यक्ष का पद चाह रहा है। कई वर्षों तक सीएम नीतीश कुमार ने अपने पास गृह विभाग रखा था। साथ ही कई विभागों में बदलाव भी चाह रहा है। हालांकि, मंत्रिमंडल में भी भाजपा बड़े भाई की भूमिका में नजर आ सकते हैं। यानी भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू की तुलना में अधिक रहेंगे। बाकी दलों के मंत्रियों की संख्या जस की तस रहेगी। सूत्र बता रहे हैं डिप्टी सीएम के लिए निशांत कुमार का नाम सबसे पहले नंबर पर है। इसके बाद विजय चौधरी का नाम सामने आ रहा है। विजय चौधरी सीएम नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेताओं में से एक हैं। पार्टी में इन दोनों के नाम पर किसी को ऐतराज भी नहीं है।
चिराग, उपेंद्र और मांझी के पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे?
2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी, उसमें 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। उसमें भाजपा से 14 , जदयू से 8, लोजपा (राम) से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल थे। सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद अब जो खाका तैयार किया गया है उसमें मंत्रियों की संख्या 33 तक जा सकती है। इसमें जदयू के 14 और भाजपा के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं चिराग की पार्टी से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से पहले जैसे ही एक-एक मंत्री रहने की बात सामने आ रही है। अगर पूरी संख्या, यानी 36 विधायक रहे तो भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा रामविलास के 2, रालोमो और हम के एक-एक मंत्री तय फॉर्मूले के तहत बनेंगे।
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विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा?
विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी। हालांकि, जब से प्रेम कुमार नागपुर से लौटे हैं तब से उनके नाम की चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर भी खूब हो रही है।
मुख्यमंत्री पद पर फिर चौंका सकती है भाजपा
सबसे अधिक सवाल मुख्यमंत्री कौन बनेगा? यह ही पूछे जा रहे हैं। भाजपा के नेताओं को यह भी लग रहा है कि कोई चौंकाने वाला नाम अचानक सीएम के रूप में न सामने आ जाए। भाजपा फिर कुछ नया दांव भी खेल ले तो अजूबा नहीं होगा। बिहार चुनाव हो चुका है। चुनाव अब लगभग पांच साल बाद होना है। ऐसे में प्रयोग के लिए किसी नए चेहरे को सीएम बनाने पर भी कोई अंतर नहीं पड़ना है। भाजपा ऐसा करती रही है, इसलिए खुलकर प्रदेश के नेता कुछ नहीं बोल रहे हैं। यही कारण है कि संजीव चौरसिया का भी नाम उछल रहा है। इसके अलावा सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, प्रेम कुमार, अभय गिरी, श्रेयसी सिंह आदि के नाम की चर्चा की भी खूब हो रही है। हालांकि, इनमें सम्राट चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। कारण है कि कुशवाहा समाज से आते हैं, जो जदयू के सामने भाजपा को मजबूत करने में काम आएगा। सम्राट चौधरी की पीठ भी सीएम नीतीश कुमार कई बार थपथपा चुके हैं। सूत्र बता रहे हैं जदयू का एक खेमा सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया चाहता है। अब देखना होगा कि दिल्ली में बैठे भाजपा के वरिष्ठ नेता किसे बिहार की गद्दी सौंपना चाहते हैं?
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