नीतीश की पुलिस डिफ्यूज नहीं कर पाई बम, केंद्र से मांगी मदद
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बिहार की राजधानी पटना के रामकृष्णानगर इलाके में स्थित एक लॉज से बृहस्पतिवार को बरामद 20 केन बमों और टाइमर लगे तीन दर्जन से ज्यादा बमों को राज्य पुलिस का बम निरोधक दस्ता डिफ्यूज नहीं कर पाया। इसके बाद उसने सीआरपीएफ के अधिकारियों से गुहार लगाई है। केंद्र से भी एनएसजी कमांडो भेजे जाने की मांग की गई है।
फिलहाल पूरे इलाके की नाकाबंदी कर दी गई है। इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने से आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है।उल्लेखनीय है कि रांची पुलिस से मिली गुप्त सूचना के आधार पर राजधानी पटना में बृहस्पतिवार रात शिवनगर में नंदलाल छपरा निवासी राम प्रवेश राय उर्फ नेताजी के मकान में छापा मारा गया था।
छापेमारी में मकान से भारी मात्रा में आईईडी और टाइमर लगे हाई इंटेंसिटी के विस्फोटक बरामद किए गए। विस्फोटकों की बरामदगी के तुरंत बाद मकान व आसपास के इलाकों को पुलिस ने खाली करा दिया।
नेताजी व मकान में रह रहे कुछ छात्रों को भी हिरासत में लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आसपास के इलाके में भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई है।
केंद्र से मांगी मदद
दरअसल, शुक्रवार सुबह जब बम निरोधक दस्ता बमों को निष्क्रिय करने पहुंचा तो उसके हाथ पांव फूल गए। एक छोटे से कमरे में मौत का इतना सामान शायद ही पहले कभी देखा गया हो। रिहाइशी इलाका होने और संसाधनों की कमी ने बम निरोधक दस्ते को बमों को हाथ लगाने से रोक दिया।
दस्ते के सदस्यों ने पहले वरिष्ठ अधिकारियों के आने के बाद ऑपरेशन शुरू करने की बात कही, फिर विचार हुआ कि मैदान में बालू से भरे बोरे मंगवाकर एक-एक कर बमों को डिफ्यूज किया जाए।
हालात की गंभीरता देखने के बाद पूरी परिस्थिति से पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग को अवगत कराया गया। दोपहर बाद बिहार सरकार ने केंद्र से संपर्क साधा और इस काम के लिए केंद्रीय एजेंसी की मांग की। मालूम हो
कि इसी साल मार्च को भूतनाथ रोड में हुए विस्फोटक के बाद भी इसी तरह के केन व टाइमर बम बरामद किए गए थे। लेकिन इस बार का जखीरा काफी बड़ा है।