फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar News Who is Kapildev Prasad who got Padma shree and what is Bawan Booti

कलाकार को पद्मश्री, कला को पहचान : कौन हैं पद्मश्री पाने वाले कपिलदेव प्रसाद और क्या है बावन बूटी, यह जानें

Thu, 26 Jan 2023 06:00 AM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा/पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा/पटना Published by: कुमार जितेंद्र ज्योति Updated Thu, 26 Jan 2023 06:00 AM IST
सार

Padma Shree - Award : कपिल देव प्रसाद के दादा शनिचर तांती ने इसकी शुरुआत की थी। फिर पिता हरि तांती ने सिलसिले को आगे बढ़ाया। जब 15 साल के थे, तभी कपिल देव प्रसाद ने इसे रोजगार के रूप में अपना लिया। आज इसकी ट्रेनिंग देकर स्वरोजगार के मौके दे रहे हैं।

विज्ञापन
Bihar News Who is Kapildev Prasad who got Padma shree and what is Bawan Booti
बिहार के नालंदा निवासी कपिल देव प्रसाद को बावन बूटी के लिए पद्मश्री पुरस्कार पाने वाले पहले व्यक्ति। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के नाम इस बार तीन पद्मश्री पुरस्कार रहे। एक तो सुपर 30 के चर्चित चेहरे आनंद कुमार। बाकी दो ऐसे चेहरे, जिनकी चर्चा खास अवसरों पर ही होती थी और वह भी सीमित। एक हैं कपिलदेव प्रसाद और दूसरी सुभद्रा देवी। इन दो बिहारियों को जिन कलाओं के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा रहा, वह कला भी अब इन पुरस्कारों से जानी जाएगी। कपिलदेव प्रसाद को बावन बूटी और सुभद्रा देवी को पेपरमेसी कला के लिए पद्मश्री मिला है। इन दोनों विधाओं को पहली बार पद्मश्री के जरिए अलग तरह की पहचान भी मिल गई है। इस स्टोरी में जानते हैं कौन हैं कपिलदेव प्रसाद और क्या है बावन बूटी?

विज्ञापन

Bihar News Who is Kapildev Prasad who got Padma shree and what is Bawan Booti
बावन बूटी कला का एक नमूना। - फोटो : Social Media

खास तरह के एक जैसे 52 टांकों की कला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के एक गांव की पहचान हैं कपिल देव प्रसाद। जिला मुख्यालय बिहारशरीफ के बसवन बीघा गांव निवासी कपिल देव प्रसाद की पहचान इसलिए भी है, क्योंकि उन्होंने बाप-दादा से सीखे हुनर को लोगों में बांटकर रोजगार का एक माध्यम विकसित कर दिया। बावन बूटी मूलत: एक तरह की बुनकर कला है। सूती या तसर के कपड़े पर हाथ से एक जैसी 52 बूटियां यानि मौटिफ टांके जाने के कारण इसे बावन बूटी कहा जाता है। बूटियों में बौद्ध धर्म-संस्कृति के प्रतीक चिह्नों की बहुत बारीक कारीगरी होती है। बावन बूटी में कमल का फूल, बोधि वृक्ष, बैल, त्रिशूल, सुनहरी मछली, धर्म का पहिया, खजाना, फूलदान, पारसोल और शंख जैसे प्रतीक चिह्न ज्यादा मिलते हैं। बावन बूटी की साड़ियां सबसे ज्यादा डिमांड में रहती हैं, वैसे इस कला से पूर्व परिचित लोग बावन बूटी चादर और पर्दे भी खोजते हैं। कपिल देव प्रसाद के दादा शनिचर तांती ने इसकी शुरुआत की थी। फिर पिता हरि तांती ने सिलसिले को आगे बढ़ाया। जब 15 साल के थे, तभी इसे रोजगार के रूप में अपना लिया। अब तो बेटा ज्यादा काम संभालता है। 

पद्मश्री के बाद बावन बूटी कला की पहचान बढ़ेगी
कपिलदेव प्रसाद याद करते हैं, "उस वक्त बिहार शरीफ स्थित नवरत्न महल में सरकारी बुनकर स्कूल खुला था। यह स्कूल हाफ टाइम था, जहां नियमित पढ़ाई जारी रखते हुए बच्चे बुनकरी सीखते थे। 1990 में स्कूल बंद हो गया तो बसवन बिगहा प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति का गठन किया गया। यह समिति बेरोजगारों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती है। आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़कर लोग इसका ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। पिछले साल बावन बूटी साड़ी को जीआई टैग मिलने की प्रक्रिया शुरू होने पर इसकी चर्चा खूब हुई थी, लेकिन असल समस्या अब भी कायम है कि बड़े बाजारों में हजारों रुपए में बिकने वाली इस कारीगरी के लिए इसके कारीगरों को उचित मेहनताना नहीं मिल पाता है। मशीनी कपड़ों के बाजार में बावन बूटी की जानकारी ही कम लोगों को थी, लेकिन पद्मश्री पुरस्कार के साथ अब यह पूरे देश में खोजा जाएगा।"

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed