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Bihar News : एक शख्स ने जीते जी करवाया खुद श्राद्ध-कर्म, पिंडदान भी कराया, तर्क सुनकर लोग हो रहे हैरान
Tue, 11 Jun 2024 03:10 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, सारण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, सारण
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Tue, 11 Jun 2024 03:10 AM IST
सार
Bihar : बिहार में एक शख्स ने अपनी जीता ज़िंदगी में ही खुद का अंतिम संस्कार कराया। खुद का श्राद्ध कर्म और पिंडदान भी कराया। उसके ऐसा करने के पीछे का उसके तर्क को सुनकर लोग हैरान हैं। फिलहाल यह एक चर्चित मामला है।
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मरने से पहले खुद का करा रहा श्राद्धकर्म।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
किसी की मृत्यु के बाद उसके परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार या श्राद्ध कर्म किया जाता है, ताकि मरने वाले की आत्मा को शांति मिल सके। लेकिन छपरा में एक ऐसा व्यक्ति है जो अपनी जीता ज़िंदगी में ही खुद का अंतिम संस्कार कर रहा है। उसने खुद का श्राद्ध कर्म और पिंडदान कराया है। इस संबंध में उस शख्स का कहना है कि मरणोपरांत शरीर का क्या होगा यह तो किसी को मालूम नहीं है, लेकिन जीते जी श्राद्ध हो जाए तो आत्मा को संतुष्टि मिल जाएगी। मामला सारण जिले के एकमा प्रखंड अंतर्गत भोदसा गांव का है।
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खुद का किया पिंडदान
सारण जिले के एकमा प्रखंड अंतर्गत भोदसा गांव के रहने वाले स्व रामरोशन पांडेय के पुत्र राजेंद्र पाण्डेय उर्फ ललका बाबा (52) ने जीते जी खुद अपना श्राद्ध करवाया है। मरणोपरांत जितने कर्म कांड परिजनों के द्वारा कराये जाते हैं, उन सभी कर्मकांड को उसने अपनी ज़िंदगी में खुद अपने आंखों के सामने ही करवाया और उसमें वह शामिल हुआ। मरणोपरांत जिस प्रकार से विधि विधान किया जाता है, ठीक उसी प्रकार से ग्यारह दिनों से विधि विधान कर खुद का पिंडदान किया।
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खुद का श्राद्ध करने के पीछे का बताया कारण
खुद का श्राद्ध कराए जाने के सवाल पर बेवाकी से जवाब देते हुए राजेंद्र पाण्डेय ने कहा कि वह अविवाहित हैं। उन्हें इस बात की चिंता हमेशा सताती थी कि मरणोपरांत उनका श्राद्ध कर्म कौन करेगा? कोई करेगा भी या नहीं। बस इसी सोच के साथ उन्होंने जीते जी आत्म श्राद्ध करने का निर्णय लिया ताकि जीते जी कर्मकांड हो जाए तो मरणोपरांत मोक्ष मिल जाएगा। श्राद्ध संपन्न होने के साथ ही इसकी चिंता दूर हो जाएगी। ग्रामीणों के बीच उनका श्राद्ध कर्म कौतूहल का विषय बना हुआ है। लोग इस बात का खूब चर्चा कर रहे हैं और यह कह रहे हैं कि ऐसा भी कहीं होता है?
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