Bihar News: कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस की संपत्ति होगी कुर्क, जानिए, कोर्ट को क्यों देना पड़ा यह आदेश
नवादा समाहरणालय और सर्किट हाउस में ढोल बजाकर नवादा व्यवहार न्यायालय कर्मी ने इश्तेहार चस्पा किया तो लोग हैरान रह गए। तय समय पर राशि की भुगतान नहीं किए जाने पर इन दोनों जगहों की संपत्ति की नीलामी कर दी जाएगी।
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देश संविधान और कानून से चलता है और उसके लिए न्यायालय है। ऐसा ही एक मामले में न्यायालय ने संज्ञान लिया है। नवादा व्यवहार न्यायालय के सब जज प्रथम आशीष रंजन के कोर्ट ने नवादा कलेक्ट्रेट और सर्किट हाउस को कुर्क करने आदेश दिया है। बता दें फुलवरिया जलाशय परियोजना रजौली में अनेकों विस्थापितों की जमीन का मुआवजा अब तक नहीं दिया गया हैं। जिसको लेकर नवादा व्यवहार न्यायालय में कई वाद दर्ज है।नवादा व्यवहार न्यायालय सब जज प्रथम आशीष रंजन ने इजराइ वाद संख्या 3/2002 में शांति देवी वगैरह बनाम बिहार सरकार वगैरह जिला समाहर्ता नवादा,कार्यपालक अभियंता फुलवरिया जलाशय परियोजना रजौली नवादा ,जिला भू अर्जन पदाधिकारी सह विशेष भू अर्जन पदाधिकारी नवादा मामले में नवादा समाहरणालय और नवादा परिसदन भवन को कुर्क करने का आदेश दिया गया है।
सोमवार को नवादा समाहरणालय और सर्किट हाउस में ढोल बजाकर नवादा व्यवहार न्यायालय कर्मी ने वादी के अधिवक्ता रंजीत पटेल के साथ कुर्क का इश्तेहार चिपकाया। वादी के पक्ष से अधिवक्ता रंजीत कुमार पटेल इस मामले को देख रहे हैं। बता दें कि बिहार सरकार की उदासीनता के कारण 2015 में इस मामले 10लाख 27हजार तीन सौ अठ्ठासी रुपए सत्ताइस पैसे का भुगतान किया जाना था ।जो भुगतान नहीं किए जाने कारण 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की राशि के साथ भुगतान करना होगा जो लगभग 25 लाख रुपए राशि भुगतान करना होगा। राशि की भुगतान नहीं किए जाने पर नवादा समाहरणालय और सर्किट हाउस की नीलामी का आदेश दिया जाएगा।
विस्थापितों के परिजन हरदिया सेक्टर सी निवासी देवीलाल ने बताया कि हमारे परिवार के कई लोग इस राशि के भुगतान नहीं किए जाने के कारण स्वर्ग लोक चले गए।मुआवजा की राशि नहीं मिलने के कारण हमलोग सभी परिवार हालत दयनीय हो गई है।रजौली सेक्टर ऐ निवासी अशोक सिंह ने बताया कि मुआवजा की राशि के इंतजार अभी भी ऐसे कितने परिवार हैं जिनका बाप दादा चल बसे पर उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया।विस्थापितों का मुआवजा दिया जाना उनका हक हैं।सरकार को विस्थापितों का मुआवजा भुगतान किया जाना चाहिए।