Shiv Mandir: संभल जैसे डर से ASI ने मंदिर की जांच नहीं की; कूड़े के ढेर में दबा था शिवालय, पटना में ऐसी भीड़!
Bihar News : 5 जनवरी को 'अमर उजाला' ने सबसे पहले यह खबर सामने लायी थी कि पटना में कचरे के ढेर के अंदर से एक शिव मंदिर निकला है। एक सप्ताह से यहां मेला लगा है, लेकिन सरकारी तंत्र इसकी पौराणिकता को लेकर चुप्पी साधे है। आज जानिए वजह।
विस्तार
पटना में अशोक राजपथ पर त्रिपोलिया हॉस्पीटल के आसपास इतनी गाड़ियां नहीं रुकती होंगी, जितनी अभी रुक रहीं। अस्पताल आने वालों की भीड़ नहीं है। नया-नया सामने आया है एक मंदिर, जिसमें महादेव के दर्शन के लिए लंबी कतार लगी है। कोई हजार तो कोई पांच हजार साल पुराना बता रहा। दो-चार किलोमीटर नहीं, 50-60 किलोमीटर दूर से भी लोग आ रहे हैं। महादेव के भक्त कहां-कहां से आ रहे हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कचरे के ढेर के अंदर यह मंदिर जब पहली बार देखा गया तो सबसे पहले 5 जनवरी को 'अमर उजाला' ने वह खबर, उसकी तस्वीर और वीडियो सामने लाया था। आज आठवां दिन है, लेकिन अब तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसका निरीक्षण नहीं किया है। ऐसा नहीं कि पता नहीं। पता है, लेकिन एक डर से एसआई की टीम यहां नहीं आ रही है।
जब भी कोई निर्माण या बनावट जमीन के अंदर से निकलती है, तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम उसकी जांच-पड़ताल करती है। इस मंदिर को कोई 500 तो कोई हजार और कोई पांच हजार साल तक पुराना बता रहा है। ऐसे में एएसआई के पास जब यह जानकारी पहुंची तो टीम ने आने का मन भी बनाया, लेकिन फिर पैर पीछे खींच लिए। बताया जा रहा है कि एएसआई ने उत्तर प्रदेश, खासकर संभल जैसे तनाव की आशंका को देखते हुए अपने महानिदेशक को पत्र लिखा है। पत्र में मंदिर और उससे संबंधित दावों की जानकारी देते हुए इसकी जांच के लिए प्रशासनिक इंतजाम की जरूरतों की भी जानकारी दी गई है। इस जमीन पर मठ का विवाद भी है और यह पटना सिटी का इलाका है- यह दो अहम कारण हैं, जिससे एएसआई के अधिकारी खुद आगे नहीं बढ़ने की हिम्मत जुटा रहे हैं। पटना सिटी में हिंदुओं और सिखों के बीच मुस्लिम आबादी भी एएसआई की नजर में है। इसके अलावा लंबे समय से इस मठ की जमीन को लेकर विवाद था, जिसके कारण खाली जमीन पर कूड़ा भरता जा रहा था।
पटना के महावीर मंदिर समेत कुछ ही मंदिरों में लोग कतार में इंतजार करते हैं। पटना सिटी के त्रिपोलिया हॉस्पीटल से 50-60 मीटर दूर नारायण बाबू गली में मठ लक्ष्मणपुर का कोइरी टोला इस समय इस मंदिर के कारण आस्था का ऐसा केंद्र बन गया है कि सुबह से शाम तक माइकिंग कर भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है। पूजा-पाठ के सामान का नया बाजार यहां जमने लगा है। भारी संख्या में महिलाओं के साथ पुरुष भी जुट रहे हैं। लंबी कतार में खड़े होकर बारी का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि कूड़े का जितना हिस्सा काटकर मंदिर को साफ कर निकाला गया है, उसके अलावा बाकी जगह पर धंसने का डर है। यहां आए लोगों ने मंदिर की पौराणिकता का दावा करते हुए कहा कि उन्हें किसी सरकारी संस्था से इस मंदिर को मान्यता दिलाने की जरूरत नजर नहीं आती, लेकिन इसके संरक्षण और यहां की व्यवस्था के लिए सरकार या प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता जरूर चिंता व क्षोभ का विषय है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.