फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar News : Pashupati paras rljp seat sharing with congress party rjd party in bihar election 2025

Bihar Election 2025 : पशुपति पारस को फिर झटका, कांग्रेस ने बता दिया- महागठबंधन में कितने दल हैं

सार

Bihar News : भतीजे चिराग पासवान के अच्छे दिन आने पर चाचा पशुपति कुमार पारस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा देकर खुद पैरों में कुल्हाड़ी मारी थी। लोकसभा चुनाव में महागठबंधन भरोसे निकले। तब भी झटका लगा। फिर झटका लग सकता है।

विज्ञापन
Bihar News : Pashupati paras rljp seat sharing with congress party rjd party in bihar election 2025
पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस अकेले चलने को रह जाएंगे मजबूर? - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिवंगत राम विलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस दिल्ली में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर बेहद आशान्वित हैं। कोई बात नहीं बनी तो बिहार विधानसभा की सभी 242 सीटों पर उतरने की बात कह चुके पारस ने अब उम्मीद जताई है कि इस महीने तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को हराने के लिए विपक्षी गठबंधन के दलों को बुलाया जाएगा। आश्चर्य! क्योंकि लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर इसी गठबंधन का दरवाजा खटखटाने पर भी जब बात नहीं बनी थी तो पारस ने राजग में ही होने की बात कही थी। तब से राजग ने उन्हें कभी अपना नहीं माना। अब कल उन्होंने खुद ही राजग से अलग होने की बात कही और अब खुद को विपक्षी गठबंधन- इंडी का हिस्सा मान लिया। झटका! कांग्रेस ने तो बिहार में पांच ही पार्टनर होने की बात कही। आज ही।

विज्ञापन


दिल्ली में बैठक के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा
मंगलवार को दिल्ली में महागठबंधन की पहली बैठक हुई, जिसमें दोनों प्रमुख दल ही शामिल हुए- राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस पार्टी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बैठे थे। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा के साथ उनसे मिलने पहुंचे। बैठक में बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और अध्यक्ष राजेश राम मौजूद रहे। इस बैठक के बाद बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि "शुरुआत अच्छी रही। अब आगे एक-एक मुद्दे पर समन्वय कर लिया जाएगा। बिहार में चूंकि पांच पार्टनर (घटक दल) हैं तो अब आगे सभी एक साथ बैठक एक-एक मुद्दे पर आम सहमति बनाएंगे।"
विज्ञापन


महागठबंधन में कितनी पार्टी है? इस सवाल का जवाब भी जानें
लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के खिलाफ बना गठबंधन- इंडी बिहार में नहीं लड़ रहा था, यह 'अमर उजाला' ने स्पष्ट बताया था। इस गठबंधन के किसी दल ने बिहार में चुनाव नहीं लड़ा। बिहार में पहले से मौजूद महागठबंधन ने ही चुनाव लड़ा और उसका नेतृत्व स्वाभाविक तौर पर तेजस्वी यादव के पास था। तेजस्वी ही लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की ओर से पतवार थामे थे। महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के अलावा तीन वामदल हैं- भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी। लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटों को इस तरह महागठबंधन ने बांटा था- राजद 26, कांग्रेस नौ, भाकपा एक, माकपा एक और भाकपा-माले तीन। विधानसभा की भी बात करें तो महागठबंधन के खाते में कागज पर राजद के 77, कांग्रेस के 19, भाकपा-माले के 11, माकपा और भाकपा के दो-दो विधायक हैं। इसके अलावा विपक्ष में महागठबंधन से बाहर सिर्फ असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक विधायक हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

यह भी जानें- बिहार विधानसभा में महागठबंधन के 111 विधायक, मगर साथ हैं 105

छठे दल के रूप में प्रवेश मिले, इस उम्मीद में टकटकी लगा रहे पारस

बिहार में कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी इस सदी में दो बार (2000 और 2010) बिहार विधानसभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़कर बुरी तरह पिट चुकी है। मायावती की बहुजन समाज पार्टी और दिवंगत राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने वर्ष 2005 के फरवरी और अक्टूबर में हुए चुनावों में क्रमश: 238 और 203 सीटों पर भाग्य आजमा कर देखा था। बसपा ने तो 2015 में भी 228 सीटों पर प्रत्याशी दिए। फरवरी 2005 के चुनाव में बसपा को महज दो, जबकि 2015 के चुनाव में बगैर खाता खोले संतोष करना पड़ा था। अक्टूबर 2005 में लोजपा ने 203 में से केवल 10 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह सारा गणित पारस के पास है। इसलिए, वह भले ही सभी 243 सीटों पर चुनाव में उतरने की बात कह चुके हों, लेकिन महागठबंधन के छठे दल के रूप में प्रवेश के लिए बेसब्र हो रहे हैं। कांग्रेस ने फिलहाल उनकी यह मंशा तोड़ दी है। इसलिए, अब अगर उन्हें साथ लेने का फैसला होता भी है तो पारस को गिनती की दो-तीन सीटों से ज्यादा की उम्मीद छोड़ देनी होगी। महागठबंधन ने लोकसभा चुनाव में भी पारस को झटका दिया था। तब लालू प्रसाद सीटें बांट रहे थे। इस बार क्या होता है, यह काफी हद तक पारस के भाग्य पर भी निर्भर करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed